US State Department का बड़ा बयान, ईरान के प्रभाव के कारण हिजबुल्लाह नहीं छोड़ रहा है हथियार.

अमेरिकी विदेश विभाग और बेरूत में स्थित अमेरिकी दूतावास ने 29 अगस्त 2026 को यह साफ कर दिया है कि लेबनान का संगठन हिजबुल्लाह अपने हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। अमेरिका का कहना है कि यह संगठन पूरी तरह से ईरान के इशारे पर काम कर रहा है और उसी के आदेशों का पालन कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि अगर लेबनान को एक सुरक्षित और स्वतंत्र देश के रूप में आगे बढ़ना है, तो हिजबुल्लाह को हर हाल में अपने हथियार डालने होंगे। अमेरिका सरकार का यह भी मानना है कि देश के भविष्य को लेकर होने वाली किसी भी बातचीत के लिए केवल लेबनान की सरकार ही एकमात्र वैध और अधिकारिक जरिया है। बेरूत स्थित अमेरिकी दूतावास के अनुसार, यदि हिजबुल्लाह अपने हथियार लेबनान सरकार को सौंपने के लिए तैयार होता है, तो वाशिंगटन इस चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए पूरी मदद करने को तैयार है।
हिजबुल्लाह प्रमुख का त्रिपक्षीय समझौते को मानने से इनकार
यह पूरा मामला तब सामने आया जब हिजबुल्लाह प्रमुख नसीम कासिम ने 28 अगस्त 2026 को लेबनान और इजराइल के बीच जून के आखिरी हफ्ते में हुए एक त्रिपक्षीय समझौते को मानने से साफ इनकार कर दिया। नसीम कासिम ने इस समझौते को अवैध, अपमानजनक और लेबनान की संप्रभुता के लिए बड़ा खतरा बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उनका संगठन किसी भी कीमत पर आत्मसमर्पण नहीं करेगा। इसके बजाय, वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 के तहत 27 नवंबर 2024 के समझौते का पालन करना पसंद करेगा और वाशिंगटन के अलावा किसी अन्य मध्यस्थ के जरिए अप्रत्यक्ष बातचीत करना चाहता है।
इजराइल की चिंता और लेबनान की सेना पर सवाल
दूसरी तरफ, इजराइली अधिकारियों ने 27 अगस्त 2026 को अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए अमेरिकी समकक्षों को बताया कि लेबनान की सशस्त्र सेना यानी LAF तय किए गए पायलट जोन में हिजबुल्लाह के हथियार छुड़ाने में पूरी तरह से नाकाम रही है। इजराइल का कहना है कि हथियारों को जब्त करने या बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की दिशा में कोई ठोस प्रगति देखने को नहीं मिली है। इस बीच, क्षेत्रीय स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि 29 अगस्त को ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजराइली हमलों की शुरुआत हुए पूरे छह महीने पूरे हो गए हैं।
राजनयिकों की वापसी और वित्तीय प्रतिबंध
क्षेत्रीय अशांति और तनाव को देखते हुए कुछ अमेरिकी राजनयिकों और उनके परिवारों ने मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी दूतावासों में वापस लौटना शुरू कर दिया है, जिससे पहले दिए गए निकासी आदेशों में बदलाव आया है। इसके साथ ही, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटस्टेड' लगातार जारी है, जिसके तहत हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में एक मिस्र के बैंक के कामकाज को निशाना बनाया गया ताकि ईरानी शासन को मिल रहे वित्तीय समर्थन को पूरी तरह से रोका जा सके।