अमेरिका ने की ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश, क्रूड ऑयल और व्यापार पर बड़ा असर

Praggya Singh sabal6 September 20263 min read35 viewsWorld
अमेरिका ने की ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश, क्रूड ऑयल और व्यापार पर बड़ा असर

मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान पर अपनी आर्थिक और सैन्य पकड़ को और ज्यादा मजबूत कर लिया है। अमेरिका के एनर्जी सेक्रेटरी Chris Wright ने 6 सितंबर 2026 को इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि अमेरिका जानबूझकर ईरान की अर्थव्यवस्था को तोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। उनका मुख्य मकसद ईरानी नीतियों में बदलाव लाना या वहां की सरकार को बदलना है। इस रणनीति के तहत अमेरिकी सेना का पूरा ध्यान ईरानी ऊर्जा उत्पादों जैसे क्रूड ऑयल, पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस के निर्यात को पूरी तरह से रोकने पर है। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने और बिना किसी बड़ी सैन्य ताकत के हालात संभालने के पक्ष में हैं, लेकिन मौजूदा प्रशासन के साथ किसी भी परमाणु समझौते की उम्मीद बहुत कम नजर आ रही है।

ईरान के तेल निर्यात और व्यापार में भारी गिरावट

इस आर्थिक संघर्ष के आंकड़े बहुत चौकाने वाले हैं। जंग शुरू होने से पहले ईरान रोजाना लगभग 2 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल का निर्यात करता था, जो घटकर August 2026 तक मात्र 220,000 से 255,000 बैरल प्रति दिन पर आ गया है। इसके अलावा ईरान के कुल व्यापार में भी 35 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कुछ तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें देश में फैली भयंकर महंगाई, मुद्रा की गिरती कीमत और खार्ग द्वीप तेल निर्यात टर्मिनल पर हुए हमले के प्रभावों को साफ तौर पर दिखाया गया है। दूसरी तरफ ईरान के ऑयल मिनिस्टर Mohsen Paknejad का दावा है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान लगभग 550 बार निशाना बनाए जाने के बावजूद यह सुविधा अभी भी चालू हालत में है।

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ईरान सरकार का कड़ा रुख और सैन्य झड़पें

ईरान के इकॉनमी मिनिस्टर Ali Madanizadeh ने उन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि प्रतिबंधों की वजह से ईरान अपने रास्ते को बदल देगा। उन्होंने साफ किया कि देश के अंदरूनी सुधारों को केवल ईरानी सरकार ही संभालेगी। वहीं पार्लियामेंट स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने चेतावनी दी है कि यदि ईरानी हितों पर आगे भी हमले जारी रहे, तो इसका बहुत तेज, भारी और खतरनाक जवाब दिया जाएगा। उन्होंने देश के भीतर बेरोजगारी और बाजार की अस्थिरता जैसी गंभीर समस्याओं को भी स्वीकार किया। सैन्य मोर्चे पर तनाव तब और बढ़ गया जब CENTCOM की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी बलों ने नाकाबंदी को सख्ती से लागू करने के लिए 92 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला, तीन जहाजों को नाकाम किया और दो जहाजों पर सवार होकर जांच की। यह कार्रवाई 5 सितंबर को अमेरिकी tankers पर हुए हमलों के जवाब में की गई थी, जब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अमेरिकी नौसेना के दो जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। इसके अलावा 6 सितंबर को ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास एक अमेरिकी मानव रहित जहाज को गिराने का दावा किया, जिसे अमेरिकी सेना ने पूरी तरह से झूठ बताया है।

कनाडा का बयान और अंतरराष्ट्रीय समर्थन

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कनाडा की फॉरेन मिनिस्टर Anita Anand और फाइनेंस मिनिस्टर François-Philippe Champagne ने 6 सितंबर 2026 को एक संयुक्त बयान जारी किया। इसमें उन्होंने ईरान की परमाणु गतिविधियों और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों को मिल रही धमकियों की कड़ी निंदा की। कनाडा ने जी-7 देशों के साथ अपनी एकजुटता दोहराई और अमेरिका के नेतृत्व में चलाए जा रहे 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के जरिए दबाव बनाए रखने के अपने समर्थन को पक्का किया। इस स्थिति का असर आम नागरिकों और खाड़ी देशों के सफर पर भी पड़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में क्षेत्रीय हालात और अधिक संवेदनशील बन सकते हैं।

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