ईरान पर इस हफ्ते अमेरिकी हमले की चेतावनी के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए एपिक फ्यूरी की धमकी दी
तुर्की में अमेरिकी राजदूत ने ईरान पर हमले के संकेत दिए, वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए 'एपिक फ्यूरी' की चेतावनी दी है।

अंकारा (तुर्की): तुर्की में अमेरिका के राजदूत और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत टॉम बैरक ने संकेत दिया है कि इस सप्ताहांत ईरान पर अमेरिकी हमला हो सकता है। बैरक ने एक इंटरव्यू में कहा कि इस हफ्ते हमले की पूरी संभावना है, हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप अभी भी तेहरान के साथ किसी समझौते के लिए तैयार हैं।
बैरक के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत के लिए उपलब्ध हैं और कई महीनों से इस पर चर्चा चल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका, उसके सहयोगियों और खाड़ी देशों के खिलाफ जारी खतरों के नतीजे भुगतने होंगे। राजदूत ने कहा कि अमेरिका का मकसद शासन बदलना नहीं बल्कि संतुलन बनाना है ताकि बंधकों की समस्या खत्म हो और दुनिया में शांति आए।
बातचीत के मुख्य मुद्दों में परमाणु प्रसार, यूरेनियम संवर्धन, होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद, ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज करना, प्रतिबंधों में ढील और इजरायल के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धताएं शामिल हैं। बैरक ने ईरानी लोगों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच फर्क बताते हुए IRGC को अमेरिका और इजरायल का दुश्मन बताया।
दूसरी ओर, फ्लोरिडा पहुंचने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में राजदूत के बयान पर अनजान बनने का नाटक किया। जब उनसे पूछा गया कि उनके राजदूत ने इस हफ्ते हमले की बात कही है, तो ट्रंप ने जवाब दिया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
हालांकि, इसके कुछ ही देर बाद फ्लोरिडा में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप का अंदाज बदल गया और उन्होंने तेहरान को सीधी सैन्य चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान राजनयिक समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका एक और 'एपिक फ्यूरी' (Epic Fury) हमला कर सकता है।
भीड़ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि या तो ईरान सहमत हो जाए या फिर हमें फिर से हमला करना होगा। उन्होंने तेहरान की रणनीतिक समझ पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वे समझदार होंगे तो सीधे काम की बात करेंगे, लेकिन उन्हें संदेह है कि ईरान ऐसा करेगा।
नवंबर के पहले हफ्ते में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में जानकारों का मानना है कि अमेरिका और ईरान दोनों के कड़े रुख के कारण पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।