ट्रंप ने माना: अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस ठिकाने पर किया जोरदार हमला
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के क़ेशम द्वीप पर अमेरिकी हमलों की पुष्टि की है। जानें क्या है पूरा मामला और ईरान की प्रतिक्रिया।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के एक एयर डिफेंस फैसिलिटी पर जोरदार हमले किए हैं। राष्ट्रपति के मुताबिक, ईरान ने इस फैसिलिटी का काम हाल ही में पूरा किया था, जिसके ठीक बाद अमेरिकी सेना ने इसे निशाना बनाया।
यह सैन्य ऑपरेशन सोमवार, 2 नवंबर 2026 की रात को चलाया गया। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थित क़ेशम द्वीप पर मौजूद ठिकानों को टारगेट किया। अमेरिकी अधिकारियों ने इस मिशन को एक सीमित और रक्षात्मक ऑपरेशन बताया है।
अधिकारियों के अनुसार, यह हमला खास तौर पर उन एयर डिफेंस उपकरणों और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल इंस्टॉलेशन पर किया गया, जिनसे अमेरिकी संपत्तियों को खतरा था। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा एक अमेरिकी विमान पर गोली चलाने की खबरें आई थीं।
इससे पहले पिछले कुछ हफ्तों में भी अमेरिका ने कई छोटे स्तर के हमले किए थे, जिनकी जानकारी पहले सार्वजनिक नहीं की गई थी। इन हमलों का मकसद व्यावसायिक शिपिंग रूट की सुरक्षा करना था। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया कि इस ऑपरेशन का मतलब कोई बड़ा युद्ध शुरू करना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के इन प्रयासों से ईरान की नौसैनिक और हवाई क्षमताओं को काफी नुकसान पहुंचा है।
दूसरी ओर, ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबदी ने अमेरिका पर लगातार आक्रामकता का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईरान को वैध आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है। हालांकि, तनाव के बावजूद ग़रीबाबदी ने यह भी कहा कि ईरान कतर की मदद से होने वाली राजनयिक बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है।
संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागर क़ालिबाफ ने कहा कि संघर्ष को दोबारा शुरू होने से रोकने की जिम्मेदारी अमेरिका की है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने अमेरिकी कार्रवाइयों का दृढ़ और तर्कसंगत जवाब दिया है।
वर्तमान में कतर के मध्यस्थ तेहरान और वॉशिंगटन के बीच की दूरी को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, मंगलवार को एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने संकेत दिया कि अभी तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो पाया है।
खबरों के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ इस संघर्ष पर चर्चा की और और अधिक हमलों की वकालत की। इसके बावजूद अमेरिकी प्रशासन फिलहाल राजनयिक रास्ते को प्राथमिकता दे रहा है।