अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, हॉर्मूज जलडमरूमध्य के पास की जबरदस्त एयर स्ट्राइक, दी कड़ी चेतावनी।

Aanya1 September 20263 min read29 viewsWorld
अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, हॉर्मूज जलडमरूमध्य के पास की जबरदस्त एयर स्ट्राइक, दी कड़ी चेतावनी।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अमरीकी राष्ट्रपति Donald Trump ने मंगलवार, 1 September 2026 को यह ऐलान किया कि अमेरिका की सेना हॉर्मूज जलडमरूमध्य के पास ईरान के ठिकानों पर बहुत बड़े और शक्तिशाली हमले कर रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह से सही ठहराया है और ईरान को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर उसने इसका कोई भी बदला लिया, तो अमेरिका की तरफ से और भी ज्यादा खतरनाक और भारी हमले किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास एक बहुत बड़ा छिपा हुआ हमला तैयार है, जिससे ईरान का नामोनिशान बहुत कम ही बचेगा। Gulf देशों में रहने वाले लोगों और भारत से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह स्थिति बहुत चिंताजनक बनती जा रही है, क्योंकि इसका असर पूरे इलाके की सुरक्षा पर पड़ रहा है।

CENTCOM ने की हमलों की पुष्टि और बंदर अब्बास में धमाके

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने मंगलवार को दोपहर 12 p.m. ET पर इन हमलों की शुरुआत होने की पुष्टि की है। अमेरिकी सेना ने सीधे तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स यानी IRGC के ठिकानों को निशाना बनाया है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि हाल ही में IRGC ने हॉर्मूज जलडमरूमध्य में जहाजों और वहां तैनात अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने की कोशिश की थी। दक्षिणी ईरान के बंदरगाह शहरों जैसे Bandar Abbas, Sirik और Qeshm Island पर जोरदार धमाके सुने गए हैं। ये हमले रविवार, 30 August 2026 को हुई झड़प के बाद शुरू हुए हैं, जब अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर ईरान के रॉकेट लॉन्चरों को तबाह कर दिया था। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक रविवार के उन हमलों में दो लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग जख्मी भी हुए थे।

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ऑयल टैंकरों पर हमले और खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंता

यह ताजा टकराव उस तनाव के बाद शुरू हुआ है जब 31 August 2026 को दो बड़े तेल के टैंकरों पर प्रोजेक्टाइल से हमले किए गए थे। इनमें से एक टैंकर सऊदी अरब का था और दूसरा साउथ कोरिया का था। इससे पहले ईरान ने अमेरिका की कार्रवाई का जवाब देते हुए जॉर्डन में बने अमेरिकी बेस पर मिसाइलें दागी थीं और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की तरफ एक ड्रोन भेजा था। जॉर्डन के अधिकारियों ने बताया था कि उन्होंने आठ मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया था। वहीं, UAE ने भी ईरानी ड्रोन को हवा में नाकाम करने की पुष्टि की थी। अच्छी बात यह रही कि दोनों देशों में इन हमलों से कोई नुकसान नहीं हुआ। कतर के विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर तुरंत चिंता जताई है और सभी तरह की सैन्य कार्रवाइयों को पूरी तरह से रोकने की मांग की है, क्योंकि इससे पूरे खाड़ी इलाके की शांति खतरे में पड़ रही है।

ईरान की प्रतिक्रिया और तेल निर्यात को लेकर चेतावनी

अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने यह संकेत दिया है कि अगर अमेरिका जून महीने में हुए सीजफायर समझौते यानी MoU की शर्तों को मानता है, तो वे भी पीछे हटने को तैयार हैं। यह समझौता जून के बीच में पाकिस्तान और Qatar की मध्यस्थता से हुआ था लेकिन कुछ हफ्तों बाद ही टूट गया था। वहीं दूसरी तरफ, ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Qalibaf ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ईरान की घेराबंदी को और ज्यादा बढ़ाता है, तो वे भी चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने साफ कहा कि अगर अमेरिका फारस की खाड़ी से ईरान का तेल निर्यात रोकता है, तो फिर दुनिया में कोई भी देश तेल बाहर नहीं बेच पाएगा। इन सब हालात के बीच गल्फ में काम करने वाले प्रवासियों और भारत के लोगों के बीच भी डर का माहौल है कि कहीं यह लड़ाई और ज्यादा न फैल जाए।

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