UAE और Jordan में ईरान का बड़ा हमला, अमेरिका के स्ट्राइक के बाद खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव.

खाड़ी देशों में इस समय हालात बहुत ज्यादा तनावपूर्ण चल रहे हैं क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी भिड़ंत शुरू हो गई है। रविवार, 30 अगस्त 2026 को अमेरिका की सेना ने ईरान के लarak द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने इस बात की पुष्टि की और बताया कि यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों को बिछाने से रोकने के लिए उठाया गया था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि यह कार्रवाई वैश्विक व्यापार पर मंडरा रहे खतरे को टालने के लिए जरूरी थी, क्योंकि इससे पहले अमेरिकी बलों ने उस इलाके से सभी समुद्री सुरंगों को साफ किया था।
ईरान की तरफ से मिला करारा जवाब और क्षेत्रीय बेस पर हमले
इस अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान चुप नहीं बैठा और उसने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को जबरदस्त पलटवार किया। ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों जैसे किंग हुसैन और अल-अजराक बेस के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के अल मिन्हाद एयर बेस को भी मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने दावा किया कि इन हमलों में बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। हालांकि, यूएई के रक्षा मंत्रालय ने अपने देश पर किसी भी हमले की बात को सिरे से खारिज कर दिया और साफ किया कि उन्होंने अमीराती पानी के ऊपर ही एक ईरानी ड्रोन को सफलतापूर्वक रोक लिया था। ईरान के अधिकारियों का कहना था कि अमेरिका के पहले हमले में दो लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे, जिसकी पुष्टि केशम द्वीप के गवर्नर ने भी की थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति और ईरानी नेताओं के बयान
इस पूरे मामले पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि अमेरिका ईरान को कड़ा जवाब देगा। उन्होंने ईरान को एक असफल राष्ट्र बताया जो सैन्य रूप से पूरी तरह कमजोर हो चुका है। दूसरी तरफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि उनका देश बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने के लिए तैयार है क्योंकि इस लड़ाई से किसी का भला नहीं होने वाला है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत गोलमहोसैन दरजी ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव और सुरक्षा परिषद को एक औपचारिक पत्र लिखकर शिकायत की है कि अमेरिका ने यूएन चार्टर के नियमों का उल्लंघन किया है और आतंकवाद को बढ़ावा दिया है।
तेल के टैंकर पर हमला और बढ़ते दाम
युद्ध जैसे इन हालातों के बीच ओमान के पास खसाब से पूरब दिशा में एक बड़ी घटना घटी। ब्रिटिश रॉयल मियामी मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने जानकारी दी कि सऊदी अरब के झंडे वाले एक तेल टैंकर जिसका नाम SIDR था, उस पर तीन प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। गनीमत यह रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई। अमेरिकी अधिकारियों ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी गलत बताया जिसमें कहा गया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई बड़ा सुपरटैंकर समुद्री सुरंग की चपेट में आया था। इन तमाम भू-राजनीतिक तनावों और हमलों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी Brent crude के दाम बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गए हैं, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।