अमेरिका का बड़ा एक्शन: Infosys, Wipro और Microsoft समेत कई टेक कंपनियों का PERM प्रोग्राम निलंबित

अमेरिका सरकार ने एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए कई वैश्विक टेक्नोलॉजी और आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम' (PERM) को निलंबित कर दिया है। इस फैसले का सीधा असर Infosys, Wipro, Tata, HCL, Capgemini, Cognizant, Microsoft और Adobe जैसी दिग्गज कंपनियों पर पड़ेगा। अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग, उपराष्ट्रपति JD Vance और अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने पुष्टि की है कि श्रम विभाग अब इन कंपनियों के नए आवेदन स्वीकार नहीं करेगा और न ही लंबित अनुरोधों पर कोई कार्रवाई करेगा।
यह कार्रवाई H-1B वीजा और PERM सिस्टम में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और दुरुपयोग के आरोपों की जांच के बाद की गई है। जुलाई 2026 में अमेरिकी श्रम विभाग के ऑफिस ऑफ इंस्पेक्टर जनरल ने इन मामलों की जांच शुरू की थी, जिसमें फर्जी भर्ती, वेतन किकबैक स्कीम, निर्धारित वेतन से कम भुगतान और 'बेंचिंग' जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं।
अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा का दावा
व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उपराष्ट्रपति JD Vance ने विशेष रूप से Microsoft को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने पिछले साल 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि उसी दौरान 6,300 H-1B वीजा और लगभग 3,000 ग्रीन कार्ड का उपयोग किया। वेंस ने इस प्रक्रिया की कड़ी आलोचना करते हुए इसे घरेलू कर्मचारियों को विदेशी श्रमिकों से बदलने का तरीका बताया।
अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी श्रमिकों के खिलाफ किसी भी तरह के भेदभाव को बर्दाश्त नहीं करेगा। गौरतलब है कि PERM प्रोग्राम के तहत नियोक्ताओं को यह प्रमाणित करना होता है कि किसी विशेष पद के लिए कोई योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है, तभी वे विदेशी नागरिक के लिए इमिग्रेशन याचिका दायर कर सकते हैं।
विदेशी कार्यबल पर यह शिकंजा कसने की शुरुआत पिछले कुछ दिनों से ही हो गई है। इस फैसले से ठीक एक दिन पहले प्रशासन ने उन विश्वविद्यालयों के लिए 70,000 डॉलर की फीस का प्रस्ताव रखा था, जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों को ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) प्रोग्राम के लिए रिकमेंड करते हैं।