अमेरिका का बड़ा ऐलान, यूक्रेन को दी गई सैन्य सहायता का पैसा अब यूरोपीय देशों से वसूलेगा अमरीका

वॉशिंगटन, 04 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका यूक्रेन को दी गई सैन्य मदद और हथियारों का खर्च अब यूरोपीय सहयोगियों से वसूलेगा। ईरान में चल रहे लंबे युद्ध के कारण अमेरिका के रक्षा भंडार पर भारी दबाव पड़ रहा है, जिसे देखते हुए यह फैसला लिया गया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कई पोस्ट शेयर करते हुए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बाइडेन ने अपने कार्यकाल के दौरान सैकड़ों अरब डॉलर के हथियार और गोला-बारूद यूक्रेन और नाटो देशों को पूरी तरह से मुफ्त में दे दिए थे। ट्रम्प ने इस नीति को गलत बताते हुए कहा कि वह इस पुराने कुप्रबंधन को सुधारेंगे और वह सारा पैसा वापस मांगेंगे, भले ही मिलने में थोड़ी देर क्यों न हो जाए।
रक्षा भंडार में आई भारी कमी
यह पूरा मामला तब सामने आया है जब अमेरिकी सेना के पास हथियारों और हथगोलों का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है। रक्षा मामलों से जुड़े संगठन ‘सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिकी पेंटागन ने लगभग 1,500 पैट्रियट एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर का इस्तेमाल कर लिया है। इस भारी इस्तेमाल की वजह से अब अमेरिकी सेना के पास यह स्टॉक घटकर 1,000 से भी कम बचा हुआ है। इसके अलावा, ‘टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस’ (थाड) इंटरसेप्टर का स्टॉक भी जो पहले 452 हुआ करता था, वह अब घटकर 300 के आंकड़े से भी नीचे आ चुका है। इन सभी आंकड़ों से साफ पता चलता है कि लगातार चल रहे युद्धों की वजह से अमेरिका के रक्षा गोदाम तेजी से खाली हो रहे हैं और देश की सुरक्षा के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है।
गोला-बारूद की कमी की खबरों को ट्रम्प ने बताया देशद्रोह
इन तमाम आंकड़ों और रक्षा विशेषज्ञों की रिपोर्टों के बावजूद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने देश में हथियारों की कमी की बात करने वाली खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि ऐसी खबरें फैलाने वाले लोग और मीडिया वास्तव में “देशद्रोही” हैं। ट्रम्प का दावा है कि अमेरिका के पास आज भी “लगभग असीमित मात्रा में मध्यम और उच्च श्रेणी का गोला-बारूद” सुरक्षित रखा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मौजूदा प्रशासन देश की घरेलू जरूरतों को सबसे पहले रख रहा है और इसी प्राथमिकता के तहत सैन्य भंडारों को दोबारा तेजी से भरा जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से आसानी से निपटा जा सके।
दो मोर्चों पर अमेरिकी सरकार के सामने बड़ी चुनौती
दूसरी तरफ, दुनिया भर के रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि एक तरफ यूक्रेन को लगातार सैन्य मदद भेजना और दूसरी तरफ ईरान के साथ महंगे युद्ध को संभालना, वॉशिंगटन के लिए एक बहुत बड़ी दोहरी चुनौती बन चुका है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि दोनों ही मोर्चों पर हथियारों और गोला-बारूद की मांग इसी तरह बनी रही, तो इससे अमेरिका और यूरोप के बीच की पुरानी साझेदारी की दिशा पूरी तरह से बदल सकती है। इस स्थिति के चलते आने वाले दिनों में यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है और उन्हें अपनी जेब से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। इस पूरी खबर की विस्तृत जानकारी आप हिन्दुस्थान समाचार पर देख सकते हैं।