अमेरिका के नए वीजा बॉंड नियम से भारत बाहर

संयुक्त राज्य अमेरिका (US) ने वीजा ओवरस्टे की समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने 50 ऐसे देशों की सूची जारी की है, जिनके नागरिकों को टूरिस्ट और बिजनेस (B1/B2) वीजा के लिए 20,000 अमेरिकी डॉलर तक का वित्तीय बॉंड जमा करना होगा। राहत की बात यह है कि इस सूची में भारत का नाम शामिल नहीं है, यानी भारतीय पासपोर्ट धारकों को इस नियम से पूरी तरह छूट दी गई है। हालांकि, दक्षिण एशिया के कुछ अन्य देश इस दायरे में आ गए हैं।
किन देशों पर लागू हुआ यह नियम?
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी संशोधित सूची के अनुसार, इस नए कार्यक्रम में कई देशों को शामिल किया गया है:
- नेपाल और बांग्लादेश के नागरिकों के लिए यह नियम पहले से ही लागू है।
- भूटान को भी इस सूची में शामिल किया गया है।
- इसके अलावा अफ्रीका, कैरेबियन, मध्य एशिया और प्रशांत क्षेत्र के कई अन्य देश भी इस बॉंड कार्यक्रम का हिस्सा हैं।
इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट की धारा 221(g)(3) के तहत अमेरिकी कंसुलर अधिकारियों को यह अधिकार दिया गया है कि वे वीजा जारी करने से पहले आवेदक से वित्तीय बॉंड की मांग कर सकें।
कितनी है बॉंड की राशि और क्या हैं शर्तें?
इस कार्यक्रम के तहत प्रभावित देशों के यात्रियों को 10,000, 15,000 या 20,000 अमेरिकी डॉलर का बॉंड जमा करना होगा। यह राशि वीजा इंटरव्यू के दौरान कंसुलर अधिकारी द्वारा तय की जाती है। इस प्रक्रिया से जुड़े कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- आवेदकों को DHS फॉर्म I-352 भरना होता है और ट्रेजरी विभाग के डिजिटल पेमेंट सिस्टम Pay.gov के माध्यम से बॉंड शर्तों की सहमति देनी होती है।
- विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदकों को केवल तभी भुगतान करना चाहिए जब कंसुलर अधिकारी इसके लिए निर्देश दें।
- यह बॉंड आवेदक खुद या अपने रिश्तेदारों, दोस्तों या बिजनेस पार्टनर के जरिए जमा करवा सकते हैं। सभी शर्तें पूरी होने पर यह राशि वापस मिल जाती है।
- यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि केवल बॉंड जमा करने से वीजा मिलने की गारंटी नहीं मिल जाती।
यात्रा पर कड़े प्रतिबंध
इस कार्यक्रम के तहत वीजा प्राप्त करने वाले लोगों को अमेरिका में प्रवेश और निकास के लिए कड़ी यात्रा शर्तों का पालन करना होगा। उन्हें केवल कमर्शियल विमानों या चुनिंदा सीमा शुल्क प्रीक्लेरेंस टर्मिनलों का उपयोग करना अनिवार्य किया गया है। वे जनरल एविएशन, चार्टर विमान, समुद्री बंदरगाहों या जमीनी सीमाओं का उपयोग करके यात्रा नहीं कर सकते। नियमों का उल्लंघन करने पर अमेरिकी नागरिकता और अप्रवासन सेवा (USCIS) द्वारा कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।