अमेरिका ने मिस्र की सैन्य मदद से हटाई मानवाधिकार शर्त

Lov Singh1 October 20263 min read0 viewsEnglish
अमेरिका ने मिस्र की सैन्य मदद से हटाई मानवाधिकार शर्त

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां अमेरिकी प्रशासन ने मिस्र के लिए अपने कड़े रुख में नरमी दिखाई है। अमेरिका ने मिस्र को दी जाने वाली करोड़ों डॉलर की सैन्य सहायता पर लागू मानवाधिकार संबंधी शर्तों को हटाने का अहम फैसला लिया है। इस कदम से दोनों देशों के बीच रक्षा और कूटनीतिक संबंध और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने मिस्र को मिलने वाली 320 मिलियन डॉलर यानी करीब 32 करोड़ डॉलर की सैन्य सहायता पर से मानवाधिकार की पाबंदियों को माफ कर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से यह बड़ा कदम उठाया गया है। इस फैसले के पीछे अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों, आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों, सीमा सुरक्षा और अप्रसार कार्यक्रमों को मुख्य आधार बनाया गया है।

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अमेरिकी संसद के सदस्यों को भेजे गए एक आधिकारिक पत्र में इस बात की जानकारी दी गई है कि वित्त वर्ष 2025 की विदेशी सैन्य सहायता के लिए तय किए गए प्रमाणन नियमों से मिस्र को यह विशेष छूट दी गई है। इसके साथ ही, एक अन्य ज्ञापन में ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान मिस्र द्वारा निभाई गई मददगार भूमिका का भी जिक्र किया गया है, हालांकि इस भूमिका के विस्तृत विवरण को सार्वजनिक नहीं किया गया है.

ऐतिहासिक संबंध और सहायता का दायरा

आपको बता दें कि अमेरिका और मिस्र के बीच रक्षा सहयोग का इतिहास काफी पुराना है। साल 1979 में इजराइल के साथ ऐतिहासिक शांति समझौता होने के बाद से ही मिस्र को अमेरिका की तरफ से लगातार सैन्य मदद मिलती आ रही है। 1980 के दशक के अंतिम वर्षों से तो यह सहायता सालाना लगभग 1.3 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है.

इस भारी-भरकम सहायता का एक हिस्सा हमेशा से लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों की शर्तों से जुड़ा होता रहा है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति के पास यह अधिकार होता है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए इन शर्तों को माफ कर सकते हैं। ماضی में भी मिस्र के मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर अमेरिका और काहिरा के बीच कई बार खींचतान देखने को मिल चुकी है। पूर्व अमेरिकी प्रशासन के दौरान भी मानवाधिकारों के मुद्दों पर कुछ समय के लिए सहायता राशि रोकी गई थी, लेकिन क्षेत्रीय परिस्थितियों को देखते हुए बाद में पूरी मदद जारी करने के रास्ते खोल दिए गए थे.

मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया और मिस्र का पक्ष

दूसरी ओर, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन मिस्र की सरकार पर लगातार गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। संगठनों का दावा है कि देश में नागरिकों के अधिकारों का हनन हो रहा है और स्वतंत्रता पर पाबंदियां हैं। हालांकि, मिस्र की सरकार हमेशा से इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करती आई है। काहिरा का यही रुख रहा है कि देश की आंतरिक स्थिरता, सुरक्षा और जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब देखना यह होगा कि अमेरिका के इस नरमी भरे रुख के बाद क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों में किस तरह के नए बदलाव आते हैं।

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