अमेरिका ने मिडिल ईस्ट के सहयोगियों को 3 नवंबर के चुनाव के बाद ईरान के हमलों के लिए किया आगाह
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट के सहयोगियों को 3 नवंबर के चुनाव के बाद ईरान के संभावित हमलों के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है।

वॉशिंगटन: अमेरिका ने मिडिल ईस्ट के अपने सहयोगियों और क्षेत्रीय देशों को औपचारिक चेतावनी जारी की है। अमेरिका ने उन्हें 3 नवंबर को होने वाले चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके जवाब में होने वाले हमलों के लिए तैयार रहने को कहा है।
मामले की जानकारी रखने वाले दो राजनयिकों के मुताबिक, ईरान की ओर से ऊर्जा केंद्रों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए जाने का बड़ा खतरा है। अमेरिका का अनुमान है कि नवंबर 2026 की शुरुआत तक उसकी पूरी सैन्य ताकत वहां तैनात हो जाएगी।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन 27 अक्टूबर 2026 को उन्होंने संकेत दिया कि वह नई सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि वह इस संघर्ष को बहुत जल्दी खत्म कर सकते हैं और एक कड़ा संदेश देकर तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोक सकते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। इसके तहत इजरायल में पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और क्षेत्र में एक एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किया गया है, साथ ही गोला-बारूद की आपूर्ति भी की जा रही है। इस संघर्ष से जुड़े अमेरिकी सैन्य खर्च 47 अरब डॉलर से अधिक हो गया है।
दूसरी तरफ, ईरान की लीडरशिप अभी भी कूटनीति का रास्ता अपनाने की बात कह रही है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 28 अक्टूबर 2026 को कहा कि तेहरान कूटनीति को सफल होने का मौका दे रहा है और युद्धविराम के प्रस्तावों पर मध्यस्थों के साथ काम कर रहा है।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद 29 अक्टूबर 2026 को कहा कि मिडिल ईस्ट को अपने मसले अमेरिकी हस्तक्षेप के बिना सुलझाने चाहिए। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव डॉ. मोहसिन रजाई ने भी कहा कि सुरक्षा क्षेत्रीय होनी चाहिए और विदेशी दखल को रोका जाना चाहिए।
क्षेत्रीय देशों ने संयम बरतने की अपील की है। यूएई के विदेश मंत्रालय ने 29 अक्टूबर 2026 को सभी पक्षों से समझदारी दिखाने और तनाव कम करने के लिए राजनीतिक समाधान निकालने को कहा। इससे पहले 23 अक्टूबर 2026 को इस्तांबुल शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्रियों ने भी नए हमलों के खिलाफ चेतावनी दी थी।
ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने पहले ही चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने दोबारा कार्रवाई की, तो पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों और हितों पर लगातार और दर्दनाक हमले होंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका का साथ देने वाले देशों को भी इस संघर्ष का हिस्सा माना जाएगा।