अमेरिका ने ईरान पर संभावित हमले की चेतावनी देकर मध्य पूर्व के सहयोगियों को अलर्ट किया

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई है, जबकि यूएई और कतर कूटनीतिक समाधान की कोशिश कर रहे हैं।

Gautam Sahu29 October 20262 min read0 viewsWorld
अमेरिका ने ईरान पर संभावित हमले की चेतावनी देकर मध्य पूर्व के सहयोगियों को अलर्ट किया

वॉशिंगटन: अमेरिका ने मध्य पूर्व के अपने कई सहयोगियों को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के तहत अमेरिकी राजनयिकों और रक्षा अधिकारियों ने यह अलर्ट जारी किया है। आशंका जताई जा रही है कि ईरान जवाबी हमले कर सकता है, जिससे क्षेत्र की ऊर्जा सुविधाओं और जरूरी बुनियादी ढांचे को खतरा हो सकता है।

हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी नए हमलों पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन सैन्य तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इसके तहत टेक्सास से पैट्रियट एयर डिफेंस बैटरी भेजी जा रही है और संवेदनशील ठिकानों से सैनिकों को हटाया जा रहा है। साथ ही हथियारों का स्टॉक बढ़ाया गया है और बॉम्बर्स व फाइटर जेट्स को तैनात किया गया है।

क्षेत्रीय अधिकारी अब एक ऐसे संघर्ष के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं जो कई दिनों तक खिंच सकता है। दूसरी तरफ, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक हस्तक्षेप की वकालत कर रहे हैं ताकि पूर्ण पैमाने पर युद्ध को टाला जा सके।

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यूएई विदेश मंत्रालय ने राजनीतिक समाधान खोजने की अपील की है। यूएई राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार डॉ. अनवर गर्गाश ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए कूटनीति ही सबसे प्रभावी रास्ता है। वहीं कतर मध्यस्थता की कोशिशों का नेतृत्व कर रहा है।

शांति प्रस्ताव को लेकर 29 अक्टूबर 2026 को अलग-अलग खबरें सामने आईं। कुछ सूत्रों का दावा है कि 26 अक्टूबर को ईरान को एक ड्राफ्ट डील दी गई थी, जिसमें विश्वास बहाली के लिए सात दिनों की समयसीमा तय थी। लेकिन ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने किसी भी औपचारिक प्रस्ताव मिलने से इनकार किया है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि तेहरान कूटनीति के लिए दरवाजे खुले रखे हुए है और विभिन्न प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। इसमें ईरान की अपनी '7-दिवसीय योजना' भी शामिल है, लेकिन उन्होंने कहा कि मध्यस्थों के मौजूदा विचार स्वीकार्य नहीं हैं। ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर अपना सख्त रुख बरकरार रखा है।

तेहरान में हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की भी मध्यस्थता के प्रयासों में जुटे हुए हैं। इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान से आने वाले खतरे को खत्म करने का संकल्प जताया है।

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