अमेरिका यूरोप में घटा सकता है फौजी ताकत, ईरान युद्ध के बाद एयरबेस देने से मना करने पर पेंटागन कर रहा है बड़ा विचार।

अमेरिका यूरोप से अपनी सैन्य ताकत को बड़ा झटका देते हुए कम करने पर विचार कर रहा है। ईरान के साथ चल रहे युद्ध के सातवें महीने में, कई यूरोपीय देशों ने अमेरिकी सेना को अपने एयरबेस का इस्तेमाल करने की अनुमति देने से साफ मना कर दिया था। इसके बाद से अमेरिकी प्रशासन यूरोप में अपने सैनिकों की संख्या में भारी कटौती करने की योजना बना रहा है। इस संभावित फैसले से यूरोप में तैनात करीब 80,000 अमेरिकी सैनिकों में से 25,000 से 40,000 सैनिकों को वापस बुलाया जा सकता है, जो शीत युद्ध के बाद से अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कटौती होगी।
पेंटागन की छह महीने की समीक्षा और राष्ट्रपति ट्रंप की नीति
यह संभावित कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के बिल्कुल अनुकूल है। पेंटागन की तरफ से इस मामले में एक छह महीने की समीक्षा शुरू की गई थी जो जून 2026 में बैठी थी। यूरोपीय कमान और यूरोप में सहयोगी बलों के कमांडर जनरल एलेक्सस ग्रिंखेविच ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ को शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को एक शुरुआती गोपनीय रिपोर्ट सौंपी। इस पूरी प्रक्रिया के बाद अंतिम सिफारिश आने की उम्मीद 6 नवंबर तक तय की गई है। जर्मनी, इटली और स्पेन वे देश हैं जिन पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा क्योंकि यहां अमेरिकी सैन्यकर्मी सबसे अधिक संख्या में तैनात हैं। इन देशों के नेताओं के बीच राष्ट्रपति ट्रंप के साथ ईरान संघर्ष को लेकर पहले भी मतभेद देखे गए थे।
यूरोपीय देशों की ना और नाटो की चिंताएं
स्पेन, इटली, फ्रांस, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया समेत कई यूरोपीय देशों ने अपनी तटस्थता, कानूनी चिंताओं और घरेलू विरोध का हवाला देते हुए अमेरिका को ईरान से जुड़े अभियानों के लिए अपने एयरस्पेस या सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। हालांकि अप्रैल 2026 में इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह के तनाव से इनकार किया था, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया था कि मौजूदा समझौतों के दायरे से बाहर अमेरिकी एयरबेस के इस्तेमाल के लिए विशेष अनुमति की जरूरत होती है। इस संभावित कटौती की खबर के बाद से नाटो के भीतर भी रूस को रोकने की सामूहिक क्षमता को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं।
कांग्रेसी नेताओं और विधायी बाधाओं की स्थिति
इस पूरे मामले में अभी कई विधायी बाधाएं भी सामने आ रही हैं। साल 2026 का रक्षा नीति विधेयक यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की संख्या को कम से कम 76,000 तक सीमित करता है, जब तक कि इसके लिए सुरक्षा और विधायी परामर्श से जुड़ी खास शर्तों को पूरा नहीं किया जाए। अमेरिकी कांग्रेस के भीतर भी इस संभावित वापसी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और सांसद इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि इस कटौती से क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा।