ईरानी ड्रोन हमले का खतरा: अमेरिका ने ब्रिटेन से हटाए अपने B-1 बॉम्बर

ईरान की ओर से संभावित ड्रोन हमलों की गंभीर चेतावनी के बाद अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ब्रिटेन स्थित रॉयल एयर फोर्स (RAF) फेयरफोर्ड बेस से अपने 12 B-1B लांसर बॉम्बर्स को वापस बुला लिया है। इस कदम के साथ ही इस बेस की वह भूमिका खत्म हो गई है, जहां से अमेरिका ईरान पर हमले की योजना बना सकता था। पेंटागन और अमेरिकी यूरोपीय कमान ने पुष्टि की है कि सभी विमान अब सुरक्षित रूप से अमेरिका लौट चुके हैं।
दरअसल, खुफिया रिपोर्टों में खुलासा हुआ था कि ईरान ने एक जटिल साजिश रची थी, जिसके तहत ड्रोन के जरिए इन विमानों को तबाह करने और बेस पर मौजूद सैकड़ों अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की योजना थी। सितंबर के अंत में जब इस खतरे का पता चला, तो सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। इस मामले में संदिग्ध गतिविधियों के बाद बेस के पास सफेद वैन में सवार पांच लोगों को पकड़ा गया था। इसके बाद 1 अक्टूबर को एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक और 6 अक्टूबर को एक 22 वर्षीय ब्रिटिश युवक को आतंकवादी गतिविधियों की तैयारी के संदेह में गिरफ्तार किया गया। कुल सात गिरफ्तारियां हुईं, हालांकि बाद में इन सभी को जमानत पर रिहा कर दिया गया।
सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बॉम्बर्स को इसलिए हटाया गया ताकि 'दुश्मन को उकसाया न जाए'। उन्होंने स्वीकार किया कि इस साजिश का मकसद 'बड़ा नुकसान' पहुंचाना था। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस कदम को अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए 'अत्यधिक सावधानी' के तौर पर बताया और इस साजिश को आतंकवाद करार दिया। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भरोसा जताया कि अमेरिकी बेस सुरक्षित हैं और रक्षा विभाग के पास संसाधनों को कहीं भी स्थानांतरित करने की क्षमता है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा कि इस पूरी साजिश में ईरान के शामिल होने के 'मजबूत संकेत' मिले हैं। हालांकि, ब्रिटेन सरकार का कहना है कि RAF फेयरफोर्ड अब भी एक सुरक्षित सैन्य ठिकाना है। दूसरी ओर, ईरान और उसके लंदन दूतावास ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन इससे पहले ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इस बेस को अपना वैध लक्ष्य बताया था। पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि B-1B, B-2 स्पिरिट और B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस जैसे बॉम्बर्स अब सीधे अमेरिका से ही दुनिया के किसी भी कोने में सटीक हमला करने में सक्षम हैं।