अमेरिका में कोरोना वैक्सीन को लेकर कोर्ट में बड़ा दावा, डॉक्टर ने कहा 28 सैनिकों की हुई मौत.

Nura Basta5 September 20263 min read39 viewsWorld
अमेरिका में कोरोना वैक्सीन को लेकर कोर्ट में बड़ा दावा, डॉक्टर ने कहा 28 सैनिकों की हुई मौत.

अमेरिका में कोविड-19 वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से बहुत बड़ी बहस छिड़ गई है और अदालत में एक सैन्य डॉक्टर ने चौंकाने वाला बयान दिया है। वॉशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना की डॉक्टर थेरेसा लॉन्ग ने वर्जीनिया की एक फेडरल कोर्ट में दिए गए अपने बयान में यह बात कही है कि वह ऐसे मामलों की जांच कर रही हैं जिनमें अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत को कोरोना के टीके से संभावित रूप से जोड़ा गया है। इस पूरे मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और पूरी दुनिया में इस पर चर्चा हो रही है कि क्या वाकई टीकों की वजह से किसी की जान गई है।

रूस के मीडिया नेटवर्क ने किया था खुलासे का जिक्र

रूस के प्रमुख टेलीविजन नेटवर्क रशिया टुडे ने बीते 14 अगस्त को कोर्ट में दिए गए बयान का हवाला देते हुए यह जानकारी सामने रखी थी। इसके मुताबिक डॉक्टर लॉन्ग कुल 2,544 ऐसी मौतों की समीक्षा कर रही हैं जिन्हें वैक्सीन एडवर्स इवेंट रिपोर्टिंग सिस्टम यानी VAERS में दर्ज किया गया था। हालांकि ये सभी मामले फिलहाल पूरी तरह से अपुष्ट हैं और इस जांच का मुख्य उद्देश्य केवल यह पता लगाना है कि इनमें से कितनी मौतों का वास्तव में उस समय लगाए गए टीके से कोई संबंध था या नहीं।

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निजी तौर पर 28 सैनिकों की मौत का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर लॉन्ग ने कोर्ट में यह भी बताया कि वह व्यक्तिगत तौर पर ऐसे 28 लोगों के बारे में जानती हैं जिनकी मौत को वह सीधे तौर पर कोरोना के टीके से जोड़कर देखती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास इन मामलों के बारे में कोई भी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं है। डॉक्टर लॉन्ग को स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर के वरिष्ठ सैन्य चिकित्सा सलाहकार के तौर पर काम करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके अनुसार उन्हें महामारी के दौरान सैन्य स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था और दो बड़े सैन्य मेडिकल डेटाबेस की समीक्षा करने का जिम्मा मिला है और उन्हें उम्मीद है कि यह पूरी जांच लगभग एक साल के भीतर पूरी हो जाएगी।

VAERS डेटाबेस को लेकर महत्वपूर्ण तकनीकी अंतर

यहाँ यह समझना बहुत जरूरी है कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मौत की रिपोर्ट का VAERS में दर्ज होना इस बात का पक्का प्रमाण बिल्कुल नहीं होता है कि वह घटना टीके की वजह से ही घटी है। यह प्रणाली केवल एक निगरानी तंत्र है जिसमें टीकाकरण के बाद सामने आने वाली हर तरह की घटनाओं की रिपोर्ट जमा की जाती है। किसी भी तरह का पुख्ता कारण और संबंध स्थापित करने के लिए अलग से बहुत बारीकी से चिकित्सकीय और वैज्ञानिक जांच की जरूरत होती है। इसलिए 2,544 के इस आंकड़े को सीधे तौर पर टीके से हुई मौतें नहीं माना जा सकता है। यह केवल उन मामलों की रिपोर्ट है जिनकी वजह और टीके के बीच संभावित संबंध की वैज्ञानिक जांच की जा रही है।

मुकदमे के दौरान सामने आई यह गवाही

डॉक्टर लॉन्ग की यह गवाही पूर्व सैन्य स्वास्थ्य अधिकारी टेरी एडिरिम से जुड़े हुए एक अन्य मुकदमे की सुनवाई के दौरान सामने आई थी। एडिरिम ने अपनी नौकरी से बर्खास्तगी को चुनौती दी थी और यह आरोप लगाया था कि उन्हें राजनीतिक कारणों की वजह से निशाना बनाया गया है। वहीं दूसरी तरफ सीआईए का यह पक्ष रहा है कि यह पूरा मामला केवल रोजगार और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े विवाद का ही है। इस पूरे मामले में डॉक्टर लॉन्ग ने बचाव पक्ष की ओर से अपनी गवाही अदालत में दर्ज कराई थी।

सेना में अनिवार्य टीकाकरण की नीति

कोरोना महामारी के उस दौर में अमेरिकी सेना के भीतर टीकाकरण को लेकर एक बहुत ही सख्त अनिवार्य नीति लागू की गई थी। उस दौरान जो भी सैनिक टीका लगवाने से इनकार करते थे उन्हें तुरंत अपनी सेवा से अलग कर दिया जाता था और हजारों सैन्यकर्मियों पर इसका असर पड़ा था। हालांकि बाद में अमेरिकी सरकार ने इस अनिवार्य नीति को पूरी तरह से समाप्त कर दिया और जो सैनिक टीका न लेने की वजह से हटाए गए थे उनके लिए फिर से बहाली का रास्ता खोल दिया गया था।

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