USS Abraham Lincoln की सैन डिएगो वापसी: 322 दिनों के लंबे मिशन के बाद घर लौटा अमेरिकी विमानवाहक पोत

अमेरिकी नौसेना का परमाणु संचालित विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln (CVN 72) आखिरकार अपने घर सैन डिएगो लौट आया है। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को यह जहाज बंदरगाह पर पहुंचा, जिससे करीब 322 दिनों तक चले एक बेहद तनावपूर्ण और लंबे सैन्य अभियान का अंत हुआ। यह जहाज 21 नवंबर 2025 को रवाना हुआ था और इस दौरान इसने समुद्र में समय बिताने के कई आधुनिक रिकॉर्ड भी बनाए।
इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) को समर्थन देना था। यह अमेरिका के नेतृत्व में ईरान के खिलाफ चलाया गया एक सैन्य अभियान था, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी 2026 को इजरायली बलों के साथ मिलकर की गई थी। इस स्ट्राइक ग्रुप का नेतृत्व कैरियर स्ट्राइक ग्रुप 3 कर रहा था, जिसमें USS Frank E. Petersen Jr., USS Spruance और USS Michael Murphy जैसे शक्तिशाली जहाज भी शामिल थे।
मिशन की उपलब्धियां और आंतरिक विवाद
जहाज ने अपनी इस यात्रा में अविश्वसनीय रिकॉर्ड दर्ज किए, जिसमें सैन डिएगो से थाईलैंड तक लगातार 286 दिन और गुआम से ओमान के बीच बिना रुके 208 दिन समुद्र में बिताने का कारनामा शामिल है। हालांकि, इन उपलब्धियों के बीच जहाज के भीतर की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक समुद्र में रहने के कारण चालक दल के सदस्यों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ताजे भोजन की कमी, सप्लाई में कटौती और सुविधाओं के खराब होने की खबरें सामने आईं, जिससे सैनिकों के मनोबल पर असर पड़ा। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि स्वतंत्र रिपोर्टों में नाविकों के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाए गए और चालक दल के बीच आत्महत्या के आठ प्रयासों के दावे किए गए।
इन आरोपों पर पेंटागन चीफ पीट हेगसेथ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नाविकों की उपलब्धियों को अभूतपूर्व बताया और मीडिया पर इस मिशन को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। वहीं, जहाज के कमांडर कैप्टन डैनियल कीलर ने कहा कि लंबे मिशन में ऐसी चुनौतियां आम हैं और नाविकों को दिन में चार बार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा था।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहाज पर अव्यवस्था की खबरों को "फेक न्यूज" करार दिया। उन्होंने दावा किया कि जहाज का रखरखाव बेहतरीन था। इसके साथ ही, राष्ट्रपति ट्रंप ने 9 अक्टूबर को यह स्पष्ट किया कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर कोई और सैन्य हमला नहीं किया जाएगा, क्योंकि ईरानी सरकार के साथ सार्थक बातचीत चल रही है।
भले ही सरकार इसे एक सफल मिशन बता रही हो, लेकिन जनता की राय अलग नजर आ रही है। प्यू रिसर्च सेंटर के एक पोल के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इस युद्ध के प्रबंधन को 65% लोगों ने नापसंद किया है, जबकि रॉयटर्स/इप्सोस के सर्वे में यह आंकड़ा 60% रहा है।