USS Abraham Lincoln की सैन डिएगो वापसी: 321 दिनों का रिकॉर्ड मिशन पूरा

Gautam Sahu9 October 20262 min read0 viewsWorld
USS Abraham Lincoln की सैन डिएगो वापसी: 321 दिनों का रिकॉर्ड मिशन पूरा

अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln आखिरकार 8 अक्टूबर 2026 को अपने होम पोर्ट सैन डिएगो लौट आया है। यह वापसी किसी साधारण यात्रा की नहीं, बल्कि एक बेहद कठिन और रिकॉर्ड तोड़ने वाले 321 दिनों के मिशन के बाद हुई है। नवंबर 2025 में रवाना हुआ यह जहाज और इसका स्ट्राइक ग्रुप 3, आधुनिक नौसेना के इतिहास में बिना किसी पोर्ट विजिट के लगातार 265 से 286 दिनों तक समुद्र में तैनात रहा, जो एक बड़ा रिकॉर्ड है।

इस पूरी तैनाती का मुख्य केंद्र ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा चलाया गया युद्ध था, जिसे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया गया। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस अभियान में USS Abraham Lincoln ने अहम भूमिका निभाई। इस जहाज ने न केवल बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाए और नौसैनिक नाकाबंदी लागू की, बल्कि ईरानी ठिकानों पर 450 टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें भी दागीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने इस मिशन को आधुनिक युग के सबसे गहन और प्रभावशाली ऑपरेशनों में से एक बताया है।

सफलता के पीछे का संघर्ष और विवाद

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भले ही सैन्य स्तर पर इस मिशन को सफल माना जा रहा है, लेकिन जहाज पर सवार लगभग 5,000 नाविकों और मरीन सैनिकों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक समुद्र में रहने के कारण ताजे भोजन की भारी कमी हो गई और जहाज की प्लंबिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं भी जवाब देने लगीं। इतना ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य और गिरते मनोबल के कारण चालक दल के बीच आत्महत्या के प्रयास जैसी दुखद घटनाएं भी सामने आईं।

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने 7 अक्टूबर को जहाज का दौरा किया और मिशन की जरूरतों के कारण तैनाती की अवधि को दो बार बढ़ाने की बात स्वीकार की। उन्होंने चालक दल को 'प्रेसिडेंशियल यूनिट साइटेशन' से सम्मानित किया, जो सैन्य स्तर का सर्वोच्च सम्मान है, हालांकि उन्होंने जहाज की खराब स्थिति से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स को गलत बताया।

दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन खराब स्थितियों की खबरों को "फेक न्यूज" करार दिया है। ट्रंप ने 9 अक्टूबर को कहा कि नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर कोई और सैन्य हमला नहीं किया जाएगा। हालांकि, अमेरिकी जनता में इस युद्ध को लेकर असंतोष है; प्यू रिसर्च सेंटर के एक सर्वे के अनुसार, 65% अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इस युद्ध को संभालने के तरीके से असहमत हैं।

इस बीच, क्षेत्रीय तनाव अभी भी बरकरार है। यमन के हूती विद्रोहियों ने रियाद हवाई अड्डे पर हुए धमाकों की जिम्मेदारी ली है, जबकि ईरानी खुफिया एजेंसी द्वारा जर्मनी में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की खबरें हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष में अमेरिका ने अब तक कम से कम 81 सैन्य विमान और ड्रोन खो दिए हैं या वे क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसी तनाव को देखते हुए अमेरिका अब USS Theodore Roosevelt जैसे अन्य संसाधनों को भी मध्य पूर्व की ओर भेज रहा है।

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