वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के देशों से AI डेटा सेंटर को क्रिटिकल पावर लोड मानने की अपील की

जेनेवा: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ने मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका (MENA) के देशों को सलाह दी है कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटरों को क्रिटिकल डायनेमिक लोड के रूप में वर्गीकृत करें। यह कदम बिजली ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को रोकने के लिए जरूरी बताया गया है।
सऊदी रिसर्च एंड मीडिया ग्रुप और बेन एंड कंपनी के साथ मिलकर तैयार की गई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। बिजली की बढ़ती मांग इन समस्याओं को और बढ़ा सकती है, जिससे क्षेत्र का AI इंफ्रास्ट्रक्चर का ग्लोबल हब बनने का लक्ष्य खतरे में पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, AI सर्वर रैक पारंपरिक वेब वर्कलोड की तुलना में कहीं ज्यादा बिजली खर्च करते हैं। जहां सामान्य वर्कलोड 3 से 10 किलोवाट बिजली लेते हैं, वहीं AI रैक 30 से 100 किलोवाट तक बिजली की खपत करते हैं।
MENA क्षेत्र में 2030 तक बिजली क्षमता में 40 प्रतिशत की वृद्धि की जरूरत है, लेकिन वर्तमान अनुमानों के अनुसार केवल 15 प्रतिशत की वृद्धि ही हो रही है। इस वजह से नियामक सुधारों की तत्काल आवश्यकता बताई गई है।
WEF ने सिफारिश की है कि जिन डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स का IT लोड 10 मेगावाट से अधिक हो, उनके लिए ग्रिड कनेक्शन आवेदन के समय बिजली मांग का विस्तृत पूर्वानुमान जमा करना अनिवार्य किया जाए। साथ ही रियल-टाइम खपत रिपोर्टिंग और पारदर्शी लागत आवंटन तंत्र लागू करने का सुझाव दिया गया है।
क्षेत्र में अत्यधिक तापमान के कारण कूलिंग एक बड़ी चुनौती है, जो वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर की बिजली खपत का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। इसके लिए इस्तेमाल होने वाला पानी ऊर्जा-गहन विलवणीकरण (desalination) प्रक्रिया पर निर्भर है, जिससे सीमित जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मैनेजिंग डायरेक्टर मारून कैरौज़ ने कहा कि AI आधारित विकास हासिल करने के लिए ऊर्जा, पानी और बुनियादी ढांचा प्रणालियों में नवाचार की जरूरत है। SRMG थिंक की मैनेजिंग डायरेक्टर निदा अलमुबारक ने बताया कि यह क्षेत्र अपनी निवेश क्षमता और ऊर्जा संसाधनों के दम पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में नेतृत्व करने की स्थिति में है।
अनुमान है कि 2030 तक AI के जरिए MENA क्षेत्र में 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का मूल्य अनलॉक होगा। हालांकि, टिकाऊ AI उपयोग के केवल 40 से 55 प्रतिशत मामले ही अब तक पायलट या स्केल चरणों तक पहुंच पाए हैं।