पश्चिम एशिया संघर्ष में 22 भारतीयों की मौत, विदेश मंत्रालय ने की पुष्टि
पश्चिम एशिया के तनाव के बीच 22 भारतीय नागरिकों की जान गई है, जिनमें 14 नाविक शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत के लिए बुरी खबर आई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि 28 फरवरी से अब तक इस हिंसा में 22 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इन आंकड़ों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मरने वालों में 14 नाविक शामिल हैं, जो क्षेत्र के मर्चेंट जहाजों पर काम कर रहे थे। कुल मौतों में से तीन मौतें सऊदी अरब में हुई हैं।
जायसवाल ने कहा कि सरकार इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता में है। भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाड़ी क्षेत्र में रह रहे लोगों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।
यह संघर्ष फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद और तेज हो गया था, जिसके जवाब में ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। इस तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में लगभग नाकेबंदी जैसी स्थिति बन गई है।
यमन स्थित हूती विद्रोहियों ने भी अपने हमलों का दायरा बढ़ा दिया है और सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। 10 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए एक हमले में 13 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें हैदराबाद के आईटी प्रोफेशनल मोहम्मद यूसुफ अली भी शामिल थे। इस हमले में 300 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें कई भारतीय भी थे।
हमलों का सिलसिला यहीं नहीं रुका और दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ-साथ अरामको की शयबाह ऑयल फील्ड जैसी सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया। इन घटनाओं के बाद भारत से सऊदी शहरों के लिए उड़ानों को निलंबित करना पड़ा, जिससे बड़ी संख्या में उमराह तीर्थयात्रियों और प्रवासी श्रमिकों को परेशानी हुई।
यूएई, सऊदी अरब, कतर, ओमान, बहरीन और कुवैत जैसे जीसीसी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं। भारतीय राजनयिक मिशन वर्तमान में मृतकों के शवों को वापस लाने और नागरिकों को सहायता प्रदान करने का काम कर रहे हैं।
दूतावासों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे स्थानीय कानूनों का पालन करें और हमलों की वीडियो रिकॉर्डिंग या फुटेज साझा करने से बचें।
समुद्री सुरक्षा को देखते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र में लाइबेरिया के साथ मिलकर 25 देशों का 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स' बनाया है, ताकि नाविकों की सुरक्षा की वकालत की जा सके। दुनिया भर में भारत के 3 लाख से अधिक नाविक हैं और एमटी पेट्रो डॉल्फिन जैसे जहाजों पर भी घटनाएं दर्ज की गई हैं।
संघर्ष की शुरुआत के बाद से अब तक 3 लाख से अधिक भारतीय इस क्षेत्र को छोड़कर जा चुके हैं।