पश्चिम एशिया संघर्ष में 22 भारतीयों की मौत, विदेश मंत्रालय ने की पुष्टि

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण 22 भारतीय नागरिकों की जान गई है, जिसमें 14 नाविक शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा पर चिंता जताई है।

Gautam Sahu31 October 20262 min read0 viewsWorld
पश्चिम एशिया संघर्ष में 22 भारतीयों की मौत, विदेश मंत्रालय ने की पुष्टि

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के बीच भारत के लिए बुरी खबर आई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि फरवरी से अब तक इस क्षेत्र में 22 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। मरने वालों में 14 नाविक शामिल हैं, जबकि तीन भारतीयों की मौत सऊदी अरब में हुई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि सरकार इस स्थिति को लेकर बेहद चिंतित है। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार उनके साथ लगातार संपर्क में बनी हुई है।

दुनिया भर में नाविकों की संख्या के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है, जहां 311,000 से अधिक पेशेवर कार्यरत हैं। इसी वजह से भारत अब बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बन रही अस्थिर स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है।

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सऊदी अरब के दम्माम स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 21 अक्टूबर की रात हुए एक हमले में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी 36 वर्षीय कमलेश पांडे की मौत हो गई। बंसगांव के किशुन पुर गांव के रहने वाले कमलेश वहां ग्राउंड स्टाफ के तौर पर काम करते थे। वह अपनी पत्नी सुनीता और दो बेटियों (14 और 10 वर्ष) का सहारा थे।

इस हमले में एक सऊदी नागरिक सुल्तान अल-काहतानी की भी जान गई, जबकि दो भारतीयों समेत आठ लोग घायल हुए। रियाद में भारतीय दूतावास उड़ानों के निलंबन के बावजूद कमलेश पांडे के पार्थिव शरीर को वापस लाने की कोशिश कर रहा है।

इससे पहले 10 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए मिसाइल हमले में हैदराबाद के मेहदीपटनम निवासी 46 वर्षीय मोहम्मद यूसुफ अली की मौत हो गई। आईटी पेशेवर अली पिछले दस साल से सऊदी अरब में रह रहे थे। इस हमले में उनकी पत्नी और बेटों को चोटें आई हैं।

क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष और सऊदी बुनियादी ढांचे पर हूती विद्रोहियों द्वारा किए जा रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण बड़ी संख्या में भारतीय देश छोड़ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी से अब तक 3 लाख से ज्यादा भारतीय इस क्षेत्र से बाहर जा चुके हैं।

नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त राष्ट्र के 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स' से इस मुद्दे पर ध्यान देने का अनुरोध किया है। वहीं, भारतीय दूतावास प्रवासियों के लिए लगातार सुरक्षा एडवाइजरी जारी कर रहे हैं।

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