पश्चिम एशिया में शांति से भारत के बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को होगा लाभ: जेफरीज
जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव घटने से भारत के पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है।

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में तनाव कम होने की संभावना से भारत के पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ी मजबूती मिल सकती है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर वहां शांति बहाल होती है तो व्यापार प्रवाह सुधरेगा, जिससे कार्गो मूवमेंट और व्यावसायिक गतिविधियों को समर्थन मिलेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि शांति प्रक्रिया के समय और परिणाम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन तनाव कम होने से भारतीय बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को फायदा होगा। जेफरीज ने बताया कि मौजूदा तनाव के दौरान रेल लॉजिस्टिक्स की तुलना में बंदरगाहों ने अधिक लचीलापन दिखाया है।
ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में Concor, Delhivery, JSW Infrastructure (JSWI), Adani Ports (ADSEZ) और Aegis Vopak (AVTL) को इस स्थिति से संभावित लाभ उठाने वाली कंपनियों के रूप में चिन्हित किया है।
आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 में पश्चिम एशिया के साथ भारत का व्यापार 229 अरब डॉलर रहा, जिसमें पेट्रोलियम, ऑयल और लुब्रिकेंट्स (POL) की बड़ी हिस्सेदारी थी। POL को छोड़कर रत्न, आभूषण और मर्चेंडाइज व्यापार 90 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल EXIM व्यापार का 11 प्रतिशत है।
तनाव का असर कार्गो मूवमेंट पर साफ दिखा है। मार्च 2026 से भारतीय बंदरगाहों के वॉल्यूम में सालाना 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि ऐतिहासिक विकास दर 6 प्रतिशत रही है। इसी दौरान POL वॉल्यूम 2 प्रतिशत बढ़ा।
कंटेनर वॉल्यूम में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसे ट्रांसशिपमेंट गतिविधियों में वृद्धि से समर्थन मिला, जिसने निर्यात-आयात कार्गो मूवमेंट की कमजोरी की कुछ हद तक भरपाई की। इसके उलट, भारतीय रेलवे के कंटेनर वॉल्यूम में 5 प्रतिशत की गिरावट आई है क्योंकि ट्रांसशिपमेंट गतिविधियों का लाभ हिनटरलैंड लॉजिस्टिक्स को नहीं मिला।
जेफरीज ने कहा कि पश्चिम एशिया में गतिविधियों के सामान्य होने से उन क्षेत्रों में थ्रूपुट और उपयोग बढ़ेगा जो क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा प्रवाह पर निर्भर हैं। ब्रोकरेज ने लॉजिस्टिक्स कंपनियों के मुकाबले पोर्ट्स के प्रति अपनी प्राथमिकता बरकरार रखी है।
रिपोर्ट के अनुसार, क्षमता विस्तार, प्रमुख बंदरगाहों पर सरकार की टर्मिनल निजीकरण पहल और परिचालन दक्षता इस विकास को सहारा देंगे। जेफरीज ने बताया कि उनके अनुमानों में वित्त वर्ष 2027 तक पश्चिम एशिया तनाव के निरंतर प्रभाव और उसके बाद वित्त वर्ष 2028 में धीरे-धीरे सुधार को शामिल किया गया है।