वेस्ट बैंक में हिंसा भड़की, इसराइली सेना ने अल-मुघय्यिर गांव में चलाए लाइव राउंड और टियर गैस

वेस्ट बैंक के रामल्ला के पास अल-मुघय्यिर गांव में 29 अगस्त 2026 को हालात उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गए जब इसराइली सेना ने स्थानीय लोगों पर लाइव एम्मोनिशन और आंसू गैस के गोले छोड़े। यह पूरी घटना तब शुरू हुई जब वहां रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिकों और सेटलर्स के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। इस कार्रवाई के दौरान इसराइली सेना ने गांव के पश्चिमी रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया और वहां से गुजरने वाली फिलिस्तीनी गाड़ियों पर भी टियर गैस के गोले दागे गए, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, मौके से कई चरवाहों को भी हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है, जिससे इलाके में डर और गुस्से का माहौल बना हुआ है।
हिंसा और झड़पों का पुराना सिलसिला
इससे ठीक एक दिन पहले यानी 28 अगस्त 2026 को भी इसी इलाके में भारी हिंसा देखने को मिली थी, जिसमें फिलिस्तीनी रेड क्रिसेंट सोसाइटी यानी PRCS ने तीन लोगों का इलाज किया था। इनमें से एक व्यक्ति को इसराइली सेना की लाइव गोलीबारी से गंभीर चोटें आई थीं, जबकि दो अन्य लोगों को सेटलर्स द्वारा बुरी तरह पीटा गया था। आधिकारिक फिलिस्तीनी समाचार एजेंसी वाफा की रिपोर्ट के अनुसार, उस दिन इसराइली सैनिकों ने कथित तौर पर उन सेटलर्स को पूरी सुरक्षा और कवर दिया जो स्थानीय लोगों के घरों पर हमला करने और मवेशियों को चुराने की कोशिश कर रहे थे। 29 अगस्त के पूरे दिन, पीआरसीएस ने वेस्ट बैंक के अलग-अलग हिस्सों से कई ऐसे लोगों के घायल होने की पुष्टि की जिन्हें इसराइली सेना की गोलीबारी और सेटलर्स के हमलों के बाद अस्पताल में इलाज देना पड़ा।
वेस्ट बैंक के दूसरे इलाकों में भी बढ़ा तनाव
अल-मुघय्यिर के अलावा वेस्ट बैंक के कई अन्य इलाकों से भी भारी तनाव और झड़पों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। अल-अमारी रिफ्यूजी कैंप में हुई एक ऐसी ही घटना में एक 15 साल के बच्चे को पीठ में गोली लगी और एक अन्य नौजवान के पैर में चोट आई। रामल्ला प्रांत में अब्दुल फत्ताह हमायेल नाम के व्यक्ति को बुरी तरह पीटा गया और अल-मुघय्यिर के पास से उनकी गाड़ी भी चुरा ली गई, जबकि सिलवाद इलाके में दो बुजुर्ग बहनों पर उनकी अपनी ही जमीन पर सेटलर्स ने हमला कर दिया। नाल्बस के दक्षिण में स्थित कुस्रा गांव में दर्जनों सेटलर्स ने एक फिलिस्तीनी घर के अंदर खुद को बंद कर लिया, जिसके बाद आईडीएफ यानी इसराइली सेना को भारी संख्या में मौके पर तैनात करना पड़ा। इसराइली सेना ने भी इस घटना में फिलिस्तीनियों के घायल होने की बात को स्वीकार किया है।
मानवाधिकार संगठनों और मंत्रालयों की प्रतिक्रिया
इस पूरी स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जाने लगी है और मानवाधिकार संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। ह्यूमन राइट्स वॉच द्वारा 20 अगस्त 2026 को जारी की गई एक रिपोर्ट में यह गंभीर आरोप लगाया गया कि इसराइली सरकार हिंसक सेटलर्स को आर्थिक मदद और हथियार मुहैया कराकर फिलिस्तीनी बस्तियों को वहां से हटाने का काम कर रही है। फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने इन सभी कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक सोची-समझी और सुनियोजित मुहिम का हिस्सा बताया, जिसके तहत लोगों पर सैन्य और आर्थिक पाबंदियां थोपी जा रही हैं। दूसरी तरफ, इसराइली डिफेंस फोर्सेज का यह कहना है कि उनके सैनिक और बॉर्डर पुलिस इलाके में हो रही हिंसा और पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए लगातार गश्त कर रहे हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।