West Bank में इसराइली Settlers का बढ़ा हमला, Palestinian Industrial Units और इकोनॉमी को किया जा रहा है टारगेट।

Sushma Kumari27 August 20263 min read50 viewsWorld
West Bank में इसराइली Settlers का बढ़ा हमला, Palestinian Industrial Units और इकोनॉमी को किया जा रहा है टारगेट।

Occupied West Bank में इसराइली settlers द्वारा Palestinian industrial facilities पर हमलों में तेजी देखी जा रही है। इस बढ़ती हिंसा का मुख्य उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से ठप करना और फिलिस्तीनी नागरिकों को उनके घरों से बेघर करना है। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 में इस तरह की हिंसा अपने चरम पर पहुंच गई है। इन हमलों में हर दिन औसतन 6.6 ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जिनमें या तो किसी की जान जा रही है या फिर भारी संपत्ति का नुकसान हो रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए ReliefWeb Report पर विजिट कर सकते हैं।

साल 2026 में हिंसा के आंकड़े और कैजुअल्टी

24 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक कम से कम 15 फिलिस्तीनियों की मौत इन हमलों में हो चुकी है, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। इन बढ़ते मामलों को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2026 के आंकड़े पिछले रिकॉर्ड को पार कर जाएंगे। इससे पहले साल 2023 में कुल 16 लोगों की मौत का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। इस लगातार बढ़ती हिंसा ने पूरे इलाके के आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है और लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं।

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Qusra इलाके में घरों की घेराबंदी और आर्थिक जंग

कुस्रा (Qusra) इलाके में 9 अगस्त से तीन घरों को लगातार घेरे में रखा गया है। आरोप है कि हमलावरों ने इन घरों की पानी और बिजली की सप्लाई पूरी तरह काट दी है और एक घर के ठीक सामने अपना अवैध ठिकाना या आउटपोस्ट बना लिया है। इस घेराबंदी की कड़ी निंदा अमेरिका के इस्राइल में राजदूत माइक हकाबी (Mike Huckabee) ने भी की है। रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि लोगों को परेशान करने के लिए आर्थिक युद्ध की रणनीतियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें सड़कों को ब्लॉक करना, फिलिस्तीनी कामगारों के वर्क परमिट रद्द करना और कस्टम ड्यूटी वसूलने में बाधा डालना शामिल है।

ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (Human Rights Watch) ने 20 अगस्त 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट में गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इसराइली अधिकारी इन समूहों को पैसे दे रहे हैं, हथियार मुहैया करा रहे हैं और उन्हें पूरी छूट दे रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा जमीन पर कब्जा किया जा सके। यूरोपीय संघ (EU) ने वेस्ट बैंक में इसराइली बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ बताया है और बस्तियों के निर्माण के टेंडर वापस लेने की मांग की है। हालांकि, अभी तक कोई ठोस जवाबी कार्रवाई या प्रतिबंध लागू नहीं किया गया है। फिलिस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास (Mahmoud Abbas) ने 27 जुलाई 2026 को आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय दखल की मांग की और इस हिंसा को एक सोची-समझी नीति बताया।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू का बयान और यस डिन की रिपोर्ट

इस बीच, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने 26 अगस्त 2026 को साफ कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद उनकी सरकार बस्तियों का विस्तार जारी रखेगी। इस्राइली मानवाधिकार संगठन यस डिन (Yesh Din) द्वारा 22 अगस्त 2026 को जारी दस्तावेज में यह बात सामने आई है कि अब हिंसा का रुख तेजी से एरिया ए और एरिया बी की तरफ मुड़ रहा है, जो कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण के नियंत्रण में आते हैं। इससे वहां मानवीय संकट और ज्यादा गहराता जा रहा है, जिसकी पुष्टि फिलिस्तीनी सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स जैसे संगठन भी कर चुके हैं।

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