West Bank में इजरायली settlers का कहर, चार साल की किंदा हसन समेत कई बच्चे स्कूल जाने से वंचित.

वेस्ट बैंक के नाब्लस के दक्षिण में स्थित कुस्रा गांव में रहने वाली चार साल की किंदा हसन उन कई फिलिस्तीनी बच्चों में शामिल हैं, जो इजरायली बस्तियों के लोगों यानी सेटलर्स के एक महीने से जारी घेराव के कारण अपना पहला स्कूल साल शुरू नहीं कर पाए हैं। इस गंभीर स्थिति ने कई परिवारों को उनके घरों के अंदर ही कैद रहने पर मजबूर कर दिया है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, सेटलर्स ने इलाके के सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया है, जिसके कारण लोगों तक खाने-पीने का सामान, पानी और बिजली जैसी बुनियादी चीजें नहीं पहुंच पा रही हैं। इस पूरे इलाके को अब एक बंद सैन्य क्षेत्र घोषित कर दिया गया है, जहां इजरायली सैनिक सेटलर्स के साथ मिलकर पहरा दे रहे हैं। सुरक्षा बलों द्वारा हटाए जाने के बावजूद ये सेटलर्स बार-बार उसी जगह पर लौट आते हैं और घरों के बाहर खड़े होकर लोगों को डराने-धमकाने के लिए लगातार चिल्लाते रहते हैं, ताकि फिलिस्तीनी लोग अपनी जमीन छोड़कर जाने के लिए मजबूर हो जाएं।
प्रभावित परिवार और बच्चों की मुश्किलें
इस घेराबंदी की वजह से कुस्रा गांव के कई परिवार गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इस संकट की चपेट में आने वालों में तीन मुख्य परिवार शामिल हैं, जिनमें से एक परिवार के पास ढाई साल की एक बीमार बेटी भी है, जिसकी देखभाल करना इस माहौल में बहुत मुश्किल हो गया है। बच्चों और बुजुर्गों को इस तरह से घरों में बंद रखना मानवीय संकट को और ज्यादा बढ़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्च कमिश्नर कार्यालय यानी OHCHR ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इन सेटलर्स द्वारा हर दिन औसतन छह हमले किए जा रहे हैं। मानवाधिकार संगठन ने इजरायली अधिकारियों से तुरंत अपील की है कि वे इन घरों में फंसे परिवारों की मदद करें और उन्हें इस दयनीय स्थिति से बाहर निकालें, ताकि उन्हें राहत मिल सके। इस पूरी स्थिति की अधिक जानकारी आप ReliefWeb Report पर जाकर देख सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े फैसले और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर बड़े राजनीतिक कदम उठाए जाने लगे हैं। 8 सितंबर 2026 को यूनाइटेड किंगडम यानी यूके की सरकार ने इजरायली बस्तियों से आने वाले सामानों पर कड़ा व्यापारिक प्रतिबंध लगाने की आधिकारिक घोषणा की। इस दौरान यूके के विदेश सचिव Ed Miliband ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह पूरा कब्जा गैरकानूनी है। यूके के इस कदम के बाद इजरायली राजनीति में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। इजरायल के विदेश मंत्री Gideon Sa'ar ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए तुरंत जवाबी उपायों का ऐलान किया। इन जवाबी कदमों के तहत यरूशलेम में स्थित ब्रिटिश कंसुलट को बंद करने का बड़ा फैसला भी शामिल है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है।
विस्थापन का नया संकट और बेघर होते परिवार
दूसरी तरफ, जमीनी स्तर पर विस्थापन का खतरा लगातार गहराता जा रहा है। जिफ्टलिक के पास स्थित अबू अल अजज बेदू समुदाय के लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। 9 सितंबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, सशस्त्र सेटलर्स द्वारा जारी किए गए डिमोलिशन यानी विध्वंस आदेशों के बाद इस समुदाय के 36 परिवारों को जबरन बेघर होने के गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग अपनी जमीनों और घरों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन लगातार मिल रही धमकियों और सैन्य कार्रवाई के कारण उनका जीवन पूरी तरह असुरक्षित हो गया है। इन तमाम घटनाओं ने वेस्ट बैंक के हालात को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है, जहां आम लोग बुनियादी अधिकारों के लिए भी तरस रहे हैं।