वर्ल्ड बैंक की चेतावनी, 2027 तक ऊर्जा की कीमतों में 32 और भोजन के दामों में 18 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी
वर्ल्ड बैंक के मुताबिक 2026-27 में ऊर्जा की कीमतों में 32% और खाने-पीने की चीजों में 18% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

वॉशिंगटन: वर्ल्ड बैंक ग्रुप ने अपनी ताजा कमोडिटी मार्केट्स आउटलुक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि दुनिया भर में बढ़ते झटकों की वजह से 2026 में कमोडिटी की कीमतों में 23 प्रतिशत की तेजी आ सकती है। बुधवार, 29 अक्टूबर 2026 को जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष ने तेल के भंडार को कम कर दिया है, जिससे ऊर्जा की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच रही हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 में ऊर्जा की कीमतों में 32 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है, जिसके बाद 2027 में इसमें कुछ कमी आएगी। ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 2025 के 69 डॉलर से बढ़कर 2026 में 91 डॉलर प्रति बैरल होने की संभावना है, जो 2027 में गिरकर 79 डॉलर रह सकती है। हालांकि, विपरीत परिस्थितियों में यह कीमत 2027 तक 105 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है।
तेल की आपूर्ति के मोर्चे पर 2026 में 5.2 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है। 2020 की मंदी को छोड़कर यह पिछले चार दशकों की सबसे बड़ी गिरावट होगी। वहीं, तेल की खपत में 2.5 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है।
भोजन की कीमतों पर असर डालते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि अनाज की शिपमेंट में बाधा और अल नीनो के प्रभाव से फसलों और आम लोगों की पहुंच पर असर पड़ेगा। खाद्य वस्तुओं की कीमतें 2026 में करीब 10 प्रतिशत और 2027 में 7 प्रतिशत और बढ़ सकती हैं, जिससे कुल मिलाकर 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। खराब परिस्थितियों में ये कीमतें बेसलाइन अनुमान से 12 प्रतिशत अधिक हो सकती हैं, जो 2022 के स्तर को पार कर जाएंगी।
खाद की कीमतों में 2026 में 14 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है, जो 2027 में फिर से 2025 के स्तर पर आ जाएगी। धातुओं की बात करें तो एल्युमीनियम, कॉपर और टिन की रिकॉर्ड कीमतों के कारण 2026 में धातुओं के दाम 25 प्रतिशत बढ़कर नए शिखर पर पहुंच सकते हैं, लेकिन 2027 में इनमें 3 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। कीमती धातुओं की कीमतों में 2026 में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है।
इन उतार-चढ़ाव से जूझ रहे देशों की मदद के लिए वर्ल्ड बैंक ग्रुप ने मौजूदा साधनों के जरिए 50 अरब से 60 अरब डॉलर उपलब्ध कराए हैं। इसमें 25 अरब डॉलर की पहले से तय वित्तीय व्यवस्था शामिल है। इन पैसों का इस्तेमाल सोशल सेफ्टी नेट, वित्तीय क्षमता और कंपनियों व खेतों के लिए नकदी बढ़ाने के लिए किया जाएगा। संस्था विकासशील देशों में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए निजी पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी ध्यान दे रही है।