वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट: भारत में 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से आए बाहर
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत में गरीबी में भारी गिरावट आई है। 49.6 करोड़ लोग लोअर-मिडल इनकम गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं।

वॉशिंगटन: वर्ल्ड बैंक की अक्टूबर 2026 की 'पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ' रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने गरीबी कम करने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 49.6 करोड़ लोग लोअर-मिडल इनकम गरीबी सीमा से ऊपर आ गए हैं।
अयागो वाम्बिल के नेतृत्व में दक्षिण एशिया के गरीबी विशेषज्ञों की टीम द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में गरीबी में सबसे तेजी से गिरावट दर्ज करने वाले देशों में भारत शामिल है। इसका मुख्य कारण खपत में मजबूत वृद्धि, महिलाओं के लिए रोजगार के बढ़ते अवसर और खाद्य सब्सिडी जैसे सामाजिक हस्तांतरणों का विस्तार बताया गया है।
आंकड़ों के मुताबिक, साल 2011-12 में 4.20 डॉलर प्रतिदिन की लोअर-मिडल इनकम गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी का हिस्सा 57.7% था, जो 2023-24 तक घटकर 16.1% रह गया है। इसी तरह, 3.00 डॉलर प्रतिदिन वाली अत्यधिक गरीबी (extreme poverty) भी 27.1% से गिरकर 2.6% पर आ गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक गरीबी 31% से घटकर 3.1% हो गई है, जबकि शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 17.4% से गिरकर 1.4% रह गया है। ये अनुमान भारत सरकार के नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन के घरेलू खपत व्यय सर्वेक्षण और माइक्रोसिमुलेशन-आधारित अनुमानों के आधार पर लगाए गए हैं।
वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कुछ सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का भी जिक्र किया है। अनुमान है कि 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली गरीबी दर 2026 में 14.2% से गिरकर 2028 तक 12.1% हो जाएगी, लेकिन संरचनात्मक चिंताएं अब भी बनी हुई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में शीर्ष 10% श्रमिकों की औसत कमाई निचले 10% श्रमिकों की तुलना में 13 गुना अधिक थी। इसके अलावा, भारत की शेष गरीब आबादी का 57% हिस्सा उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले एक भौगोलिक क्षेत्र में केंद्रित है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही में युवाओं की बेरोजगारी दर बढ़कर 15.9% हो गई है, जो पिछले साल की इसी अवधि में 14.6% थी।