भारत में ब्रिक्स समिट के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थता की पेशकश की है.

Praggya Singh sabal12 September 20263 min read20 viewsWorld
भारत में ब्रिक्स समिट के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थता की पेशकश की है.

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने औपचारिक रूप से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए शांति वार्ताओं में मध्यस्थता करने की पेशकश की है. राष्ट्रपति शी ने 12 सितंबर 2026 को यह बात कही और दुनिया के सभी देशों से अपील की कि इस संघर्ष को रोकने के लिए मिलकर काम करना जरूरी है क्योंकि यह युद्ध किसी के भी फायदे में नहीं है. चीन का यह कदम मध्य पूर्व में शांति लाने की कोशिशों का हिस्सा है और वे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं.

कतर की मध्यस्थता का समर्थन

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी. उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलرحمن अल थानी से मुलाकात के दौरान कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच की समस्या को सुलझाने के लिए केवल सैन्य ताकत का इस्तेमाल करना कोई सही रास्ता नहीं है. बातचीत के जरिए ही इस मसले को हल किया जा सकता है. इसके अलावा चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी साफ किया कि बीजिंग कतर की अगुवाई में चल रही शांति कोशिशों का पूरा समर्थन करता है और पाकिस्तान समेत दूसरे क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर जल्द से जल्द शांति स्थापित करने के लिए तैयार है.

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ब्रिक्स देशों का संयुक्त घोषणा पत्र

इस सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स समूह के सभी बड़े नेताओं ने मिलकर एक संयुक्त घोषणा पत्र को मंजूरी दी. इस समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ़्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं. इस दस्तावेज में साफ तौर पर कहा गया है कि सभी मुद्दों को सुलझाने के लिए केवल कूटनीति का रास्ता अपनाया जाना चाहिए. नेताओं ने किसी भी तरह के एकतरफा दबाव का विरोध किया और बातचीत के जरिए परमाणु जोखिमों को कम करने की जरूरत पर जोर दिया.

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता तनाव

यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से ही काफी तनावपूर्ण चल रहे हैं. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जुलाई में जॉर्डन में हुए एक ईरानी मिसाइल हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी, जिसमें चीनी कंपनियों द्वारा मुहैया कराई गई सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किए जाने का शक जताया गया है. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने सीधे तौर पर चीनी सरकार का हाथ होने का आरोप नहीं लगाया है, लेकिन इस घटना की वजह से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है. यह घटना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 24 सितंबर को होने वाली निर्धारित बैठक से ठीक पहले सामने आई है.

क्षेत्रीय नेताओं की आपसी बातचीत

नई दिल्ली में आयोजित इस समिट के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी मुलाकात की. दोनों नेताओं ने इस दौरान क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को लेकर आपसी चर्चा की, ताकि मध्य पूर्व के हालात को सुधारा जा सके और आने वाले समय में शांति बनी रहे.

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