व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग का संदेश, अमेरिका के साथ स्थिर रिश्ते बनाने पर जोर

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर व्हाइट हाउस पहुंचे शी जिनपिंग ने कहा कि उनकी यह यात्रा दोनों देशों के बीच की दूरियों को कम करने और लोगों के हित में काम करने के लिए है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया कई तरह के बदलावों और बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है।
व्हाइट हाउस में हुई अहम बातचीत
वाशिंगटन में 24 सितंबर को दिए गए अपने बयान में शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका के रिश्ते इस समय एक अहम मोड़ पर हैं। व्हाइट हाउस के ग्रैंड फोयर में तैयार किए गए अपने बयान में उन्होंने यह भी साफ किया कि दोनों देशों पर मानव विकास और प्रगति को आगे बढ़ाने की बहुत बड़ी ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर चीन-अमेरिका संबंधों को एक स्थिर दिशा देने के लिए तैयार हैं ताकि आने वाले समय में किसी भी तरह की बड़ी परेशानी से बचा जा सके।
चीनी राष्ट्रपति ने बातचीत के दौरान यह भी माना कि दोनों देशों के आर्थिक हित एक-दूसरे से बहुत गहराई से जुड़े हुए हैं। उनके मुताबिक, भले ही चीन और अमेरिका का आपसी सहयोग दुनिया की हर एक समस्या का समाधान नहीं कर सकता, लेकिन इस सहयोग के बिना कई बड़ी वैश्विक समस्याओं को हल करना नामुमकिन जैसा है। इसलिए दोनों पक्षों को मिलकर काम करने की जरूरत है ताकि पूरी दुनिया में शांति और स्थिरता बनी रहे।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई पर विशेष जोर
इस बैठक के दौरान तकनीक के क्षेत्र को लेकर भी बड़ी बात सामने आई। शी जिनपिंग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई को दोनों देशों के बीच सहयोग का एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका दोनों ही इस तकनीक के मामले में दुनिया में सबसे आगे हैं। ऐसे में दोनों देशों के पास यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वे इस आधुनिक तकनीक को इंसानों के फायदे के लिए विकसित करें और सही से प्रबंधित करें।
उन्होंने इस बात पर खास जोर दिया कि एआई का विकास हमेशा इंसान के नियंत्रण में रहना चाहिए। तकनीक का इस्तेमाल कभी भी इंसानों के नुकसान के लिए नहीं बल्कि लोगों के कल्याण और भलाई के लिए होना चाहिए। दोनों नेताओं की इस उच्च स्तरीय बातचीत में एआई के नियमों और सुरक्षा को लेकर भी चर्चा होने की पूरी उम्मीद जताई गई है।
अमेरिका आएंगे दो नए पांडा
चीन और अमेरिका के बीच पुरानी दोस्ती की मिसाल माने जाने वाले पांडा का मुद्दा भी इस यात्रा के दौरान चर्चा में रहा। शी जिनपिंग ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही 'मैत्री दूत' परंपरा को याद किया। उन्होंने जानकारी दी कि आने वाले कुछ दिनों में चीन की तरफ से दो विशाल पांडा अमेरिका के अटलांटा शहर में स्थित एक चिड़ियाघर में भेजे जाएंगे। अटलांटा चिड़ियाघर ने पहले ही यह बात साफ कर दी है कि आने वाले दोनों पांडा के नाम पिंग पिंग और फू शुआंग रखे गए हैं।
गौरतलब है कि अमेरिका और चीन के बीच इस खास पांडा कूटनीति की शुरुआत साल 1972 में हुई थी। यह शुरुआत तब हुई थी जब अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने चीन की ऐतिहासिक यात्रा की थी। दोनों देशों के चिड़ियाघरों के बीच हुए पुराने समझौतों के नियम के मुताबिक, इन पांडा और उनसे आगे पैदा होने वाली सभी संतानों का असली मालिकाना हक चीन के पास ही रहता है। इसके साथ ही उनके सही रखरखाव और देखभाल के लिए अमेरिकी चिड़ियाघरों को चीन को नियमित रूप से भुगतान करना पड़ता है।