शिनजियांग में स्टारबक्स स्टोर खोलने पर विवाद, अमेरिकी सांसद की आलोचना पर चीन का पलटवार

दुनियाभर में अपने कॉफी प्रेमियों के बीच मशहूर स्टारबक्स ब्रांड इन दिनों एक ऐसे विवाद में घिर गया है, जहाँ कॉफी की खुशबू के साथ राजनीतिक गर्माहट भी महसूस की जा रही है। मामला चीन के संवेदनशील क्षेत्र शिनजियांग से जुड़ा है, जहाँ हाल ही में इस मशहूर अमेरिकी कॉफी चेन ने अपने नए आउटलेट्स का आगाज किया है। इस कदम के बाद से ही महाशक्तियों के बीच एक बार फिर जुबानी जंग छिड़ गई है।
उरुमची में खुले नए कैफे और शुरू हुआ घमासान
हाल ही में, यानी 29 सितंबर को, स्टारबक्स ने चीन के शिनजियांग प्रांत की राजधानी उरुमची में अपने पहले दो कैफे खोले। इनमें से एक स्टोर शहर के प्रसिद्ध ग्रैंड बाजार में स्थापित किया गया है, जबकि दूसरा स्टोर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शुरू हुआ है। जैसे ही इन स्टोरों के खुलने की खबर सामने आई, वैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। स्टारबक्स की चीनी इकाई ने स्पष्ट किया है कि वह इस क्षेत्र में अपने कारोबार और निवेश को आगे भी जारी रखेगी।
अमेरिकी सांसद की कड़ी आपत्ति
इस विकासक्रम पर अमेरिका की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई है। अमेरिकी कांग्रेस की चीन संबंधी चयन समिति के अध्यक्ष जॉन मूलिनार ने स्टारबक्स के इस कदम की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कंपनी से तुरंत प्रभाव से शिनजियांग में अपने दोनों स्टोर बंद करने की मांग की है। उनका तर्क है कि इस क्षेत्र में उइगर मुस्लिमों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ है, और ऐसे माहौल में वहां व्यापार करना परोक्ष रूप से चीनी प्रशासन की नीतियों के साथ खड़ा होना माना जा सकता है।
चीन का तीखा पलटवार
अमेरिकी सांसद की इस मांग और मानवाधिकारों से जुड़े आरोपों पर बीजिंग ने भी तुरंत और कड़ा रुख अपनाया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने शिनजियांग में किसी भी तरह के मानवाधिकार उल्लंघन या नरसंहार के अमेरिकी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। चीनी अधिकारियों का कहना है कि ये सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं और इनके पीछे राजनीतिक हित छिपे हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिकी समिति केवल राजनीतिक उद्देश्यों के तहत चीन की छवि धूमिल करने के लिए ऐसे मनगढ़ंत दावे कर रही है। बीजिंग का हमेशा से यह पक्ष रहा है कि शिनजियांग क्षेत्र में उनकी नीतियां और कदम आतंकवाद, अलगाववाद और धार्मिक उग्रवाद से निपटने तथा वहाँ सामाजिक स्थिरता एवं शांति बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं। बहरहाल, कॉफी के कप के साथ शुरू हुआ यह विवाद अब भू-राजनीतिक गलियारों में एक नया मुद्दा बन चुका है।