यमन में हौथी हमलों से तनाव बढ़ा, राष्ट्रपति ने नागरिकों से की लामबंदी की अपील।

यमन में हौथी विद्रोहियों की बढ़ती आक्रामकता ने एक बार फिर देश की शांति भंग कर दी है। इसी के मद्देनजर, यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (PLC) ने कड़ी चेतावनी जारी की है कि हौथी हमलों के कारण मानवीय संकट बढ़ रहा है और आम नागरिकों को भारी कष्ट झेलने पड़ रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, 26 सितंबर, 2026 को राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी ने हौथी मिलिशिया को यमन के भीतर और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर शत्रुतापूर्ण कार्रवाई शुरू करने के लिए जिम्मेदार ठहराया। इन हमलों से न केवल बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए हैं, बल्कि आबादी को भूखा मरने का खतरा भी पैदा हो गया है। इसी के जवाब में, राष्ट्रपति अल-अलीमी ने राष्ट्रव्यापी लामबंदी की आधिकारिक अपील की है, जिसमें यमनी नागरिकों से देश के सुरक्षा बलों का समर्थन करने और गणतंत्र की संस्थाओं की रक्षा करने का आग्रह किया गया है।
हौथी विद्रोहियों के लिए आम माफी का ऐलान
एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, राष्ट्रपति अल-अलीमी ने 26 सितंबर से प्रभावी होने वाली एक आम माफी की घोषणा भी की है। यह माफी उन व्यक्तियों के लिए है जो हौथी मिलिशिया को छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं। इस पहल का उद्देश्य जीवन बचाना और आगे होने वाली बदले की हिंसा को रोकना है, ताकि देश में स्थिरता बहाल हो सके। राष्ट्रपति अल-अलीमी ने जोर देकर कहा कि किसी भी राज्य की ताकत उसकी सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों के एकजुट प्रदर्शन पर निर्भर करती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों और सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन से यमनी राज्य संस्थाओं की बहाली का समर्थन करने की भी अपील की, यह बताते हुए कि क्षेत्रीय स्थिरता इन्हीं प्रयासों पर निर्भर करती है।
यह घोषणा उप-राष्ट्रपति अब्दुल्ला अल-अलीमी बवाज़िर के 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए भाषण के बाद आई है, जिसमें उन्होंने हौथी आंदोलन की हठधर्मिता और मानवीय संघर्षविराम का दुरुपयोग सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए करने की कड़ी आलोचना की थी। उप-राष्ट्रपति ने स्पष्ट रूप से संघर्ष के लंबे खिंचने और इसके क्षेत्रीय विस्तार को ईरान द्वारा प्रदान किए गए सैन्य समर्थन से जोड़ा था।
विस्थापन और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चिंता
सैन्य खुफिया रिपोर्टों से पता चलता है कि देश में विस्थापन तेजी से बढ़ा है। 22 सितंबर तक, आठ गवर्नरेट में 158,000 से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। यह स्थिति हौथी हमलों के कारण उपजे मानवीय संकट को और गहरा करती है। हाल ही में रियाद पर हुए हौथी हमलों के जवाब में, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुखों ने रियाद में एक बैठक की थी। इस बैठक में सामूहिक सुरक्षा उपायों और मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के कार्यान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। यह बैठक क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए इन देशों के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाती है। (स्रोत: qna.org.qa)