यमन सरकार का आरोप: हूती विद्रोहियों को सैन्य मदद दे रहे हिजबुल्लाह और ईरान
यमन सरकार ने दावा किया है कि ईरान के IRGC और हिजबुल्लाह के सैन्य विशेषज्ञ हूती मिलिशिया को मिसाइल और ड्रोन तकनीक में मदद कर रहे हैं।

यमन: यमन सरकार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि लेबनान का हिजबुल्लाह समूह और ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) मिलकर हूती मिलिशिया को सैन्य सहायता प्रदान कर रहे हैं। यमन की विदेश मंत्री डॉ. अफराह अल-ज़ौबा ने इन आरोपों के मद्देनजर यमन और लेबनान के बीच आपसी कदम उठाने की औपचारिक मांग की है।
यह मामला तब सामने आया जब यमन के आंतरिक मंत्री इब्राहिम हैदान ने 3 नवंबर, 2026 को एक घोषणा की। उन्होंने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने यमन के भीतर सक्रिय 21 विदेशी सैन्य विशेषज्ञों की पहचान की है। सरकार के मुताबिक, इनमें से 14 सदस्य ईरान के IRGC के हैं और सात ऑपरेटिव हिजबुल्लाह से जुड़े हुए हैं।
यमनी अधिकारियों का दावा है कि ये विदेशी विशेषज्ञ हूती मिलिशिया को रणनीतिक मदद दे रहे हैं। इनमें सैन्य योजना बनाना, कमांड और कंट्रोल ऑपरेशंस की देखरेख करना और मिसाइल व ड्रोन विकसित करना शामिल है। इसके अलावा, उन पर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और समुद्री हमलों के समन्वय में मदद करने का भी आरोप है।
दूसरी ओर, हिजबुल्लाह ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। समूह ने इन दावों को निराधार बताया है और कहा है कि यमनी बलों के पास अपने रक्षा कार्यों को संभालने के लिए पर्याप्त आंतरिक विशेषज्ञता मौजूद है।
विदेश मंत्री डॉ. अल-ज़ौबा ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाया है। उन्होंने पेरिस में प्रेस ब्रीफिंग और बर्लिन में राजनयिक बैठकों के दौरान यह बात रखी, जिसमें 4 नवंबर, 2026 को जर्मन विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल के साथ हुई बैठक भी शामिल थी।
बढ़ते तनाव के बीच 4 नवंबर को लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन रशाद अल-अलीमी के बीच सीधी बातचीत हुई। इस दौरान लेबनानी पक्ष ने यमन के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह के हस्तक्षेप की औपचारिक अस्वीकृति जताई।
यमन सरकार का मानना है कि विदेशी हस्तक्षेपों की वजह से वहां चल रहा संघर्ष लंबा खिंच रहा है। सरकार के अनुसार, इससे नागरिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नेविगेशन के लिए खतरे और अधिक बढ़ गए हैं।