Yemen का बड़ा अलर्ट: लाल सागर में जहाजों पर हूती हमलों से बढ़ा भारी खतरा, सऊदी पर भी हुआ हमला

Nura Basta9 September 20263 min read37 viewsYemen
Yemen का बड़ा अलर्ट: लाल सागर में जहाजों पर हूती हमलों से बढ़ा भारी खतरा, सऊदी पर भी हुआ हमला

कतर में यमन के राजदूत ने लाल सागर और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बढ़ते हूती हमलों को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। इस चेतावनी में कहा गया है कि ये लगातार हो रहे हमले वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके हैं। यह घटनाक्रम September 7 और September 9, 2026 के बीच दोनों पक्षों के बीच बढ़े तनाव के बाद सामने आया है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

यमन के हूती विद्रोहियों ने September 7 और September 8 को दक्षिण-पश्चिमी Saudi Arabia पर बड़े हमले किए। इन हमलों में वहां के महत्वपूर्ण तेल और बुनियादी ढांचा सुविधाओं को निशाना बनाया गया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों के कारण कम से कम 73 लोग घायल हो गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इन हमलों से कई जगह भीषण आग लग गई, जिसके चलते कुछ समय के लिए कई तेल सुविधाओं में काम रोकना पड़ा। इसके अलावा, September 7 को लाल सागर में एक मालवाहक जहाज Tihama पर भी हमला किया गया, जिसमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत होने की खबर मिली है। हूती समूह ने दावा किया है कि उनके ये हमले सऊदी अरब द्वारा किए गए 100 से अधिक हवाई हमलों का जवाब हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक यह हमला बंद नहीं होता, वे अपनी घेराबंदी की रणनीति जारी रखेंगे।

कतर और यूरोपीय संघ ने की हमलों की कड़ी निंदा

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इस घटना के बाद वैश्विक स्तर पर कड़ी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। Qatar के विदेश मंत्रालय ने September 8 को एक आधिकारिक बयान जारी कर सऊदी अरब के नागरिक और आर्थिक क्षेत्रों पर हूती विद्रोहियों के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। कतर सरकार ने इन हरकतों को सऊदी की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए एक गंभीर खतरा बताया है। कतर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2216 और 2722 का पुरजोर समर्थन करने की अपील की है। इसी तरह, European Union ने भी दोनों पक्षों से तुरंत युद्धविराम की मांग की है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2722 (2024) और 2826 (2026) का पालन करने को कहा है।

वैश्विक नेताओं और अधिकारियों की कड़ी प्रतिक्रिया

सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता Major General Turki Al-Maliki ने हूती विद्रोहियों के इन हमलों को बेहद खतरनाक और बेतुका करार दिया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन सेना इसका कड़ा और माकूल जवाब देगी। वहीं, यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत Hans Grundberg ने चेतावनी दी है कि ड्रोन और मिसाइल हमलों से यह संघर्ष और अधिक फैल सकता है, जिससे यमन में शांति बहाली के राजनीतिक प्रयासों को बड़ा नुकसान पहुंचेगा। इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच मजबूत रक्षात्मक संबंध बने हुए हैं और वे इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं। यमन में अमेरिकी दूतावास ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि हूती विद्रोहियों को अपनी इस आक्रामकता के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

वैश्विक व्यापार और समुद्री मार्गों पर पड़ा गंभीर असर

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते Bab el-Mandeb Strait पर पड़ा है। जुलाई 2026 के अंत से ही हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जहाजों की घेराबंदी करने और उन पर हमले करने की शुरुआत की थी। तब से अब तक कम से कम चार तेल टैंकरों को निशाना बनाया जा चुका है। इन हमलों के डर से इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है और जहाजों को अफ्रीका के Cape of Good Hope से घूमकर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे माल ढुलाई का खर्च और समय दोनों बढ़ गए हैं। तनाव तब और अधिक बढ़ गया जब September 9, 2026 को ईरान ने Strait of Hormuz के पास 10 जहाजों पर हमले की जिम्मेदारी ली। ईरान का यह कदम उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिकी सेना ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को समुद्र में डुबो दिया है। इन सभी घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार संकट में पड़ सकते हैं।

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