यमन की सेना ने ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन के तहत हूती मिलिशिया के कई रक्षा ठिकानों और किलाबंदी को तबाह किया

यमन: यमन की सशस्त्र सेनाओं ने हूती मिलिशिया के खिलाफ चलाए गए सैन्य अभियान में बड़ी कामयाबी का दावा किया है। सेना ने बताया कि उन्होंने हूती लड़ाकों की किलाबंदी, खाइयों और कॉम्बैट पॉइंट्स को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। यह कार्रवाई 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' का हिस्सा है, जिसका मकसद हूती समूह की हमला करने की क्षमता को खत्म करना है।
सेना के प्रवक्ता माजद अल-नुज़ैली ने 14 अक्टूबर 2026 को जारी आंकड़ों में बताया कि सरकारी बलों ने 2,309 सटीक हमले किए। इन हमलों में करीब 1,250 हूती लड़ाकों के मारे जाने और 460 से ज्यादा सैन्य वाहनों और उपकरणों के नष्ट होने का अनुमान है।
तैज़ गवर्नर क्षेत्र में भीषण लड़ाई जारी है, जहां करीब 8 लाख आम नागरिक फंसे हुए हैं। सेना ने इस इलाके में 100 हूती लड़ाकों को ढेर करने और पांच ड्रोन गिराने की जानकारी दी है।
यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन रशाद अल-अलीमी ने हूती लड़ाकों के लिए माफी का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि जो लड़ाके अपने हथियार डाल देंगे, उन्हें आम माफी दी जाएगी।
सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भी इन जमीनी कोशिशों में समर्थन दिया है। गठबंधन ने 15 अक्टूबर को बताया कि उन्होंने हूती नियंत्रण वाले इलाकों में 136 सैन्य ठिकानों और 120 से ज्यादा हथियारों के डिपो को तबाह कर दिया है। मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने पुष्टि की कि हूती बैलिस्टिक मिसाइल नेटवर्क को खत्म करने के प्रयास जारी हैं।
इसी बीच, 15 अक्टूबर को मदीना के ऊपर एक क्रूज मिसाइल को रोका गया। हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने मदीना की घटना में शामिल होने से इनकार किया, लेकिन उसी दिन अदन में सरकारी महल के पास हुए छह विस्फोटों की जिम्मेदारी हूती समूह ने ली है।
विदेश मंत्री अफ़राह अल-ज़ुबा ने 14 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि सरकार पुराने असफल युद्धविरामों की ओर लौटने के विकल्प को खारिज करती है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार का पूरा ध्यान अब अपने क्षेत्रों पर नियंत्रण वापस पाने पर है।
सरकार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों 2216, 2624 और 2722 के तहत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को बढ़ाने की मांग कर रही है। इसका उद्देश्य हूतियों के हथियारों की खरीद और उनके वित्तीय नेटवर्क को रोकना है ताकि हिंसा को कम किया जा सके।