यमन सेना का बड़ा हमला, हाउथी ठिकानों और हथियारों पर ताबड़तोड़ वार

यमन में संघर्ष एक बार फिर तेज़ हो गया है. यमनी सशस्त्र बलों ने हाल ही में ताइज़ प्रांत के पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में हाउथी मिलिशिया के ठिकानों, गोला-बारूद डिपो और सुदृढीकरण काफिलों पर ज़बरदस्त हमला किया है. यह कार्रवाई 26 सितंबर 2026 को हुई, जिसने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है. सैन्य प्रवक्ता माजिद अब्दुल्ला अल-नाज़िली ने सोशल मीडिया के ज़रिए इन अभियानों की पुष्टि की है और हमलों के फुटेज भी जारी किए हैं, जिनमें कार्रवाई की गंभीरता साफ देखी जा सकती है.
अल-नाज़िली के मुताबिक, जारी किए गए फुटेज में धुबाब और पूरे ताइज़ प्रांत में हाउथी आपूर्ति मार्गों पर हुए हमले साफ तौर पर देखे जा सकते हैं. इन हमलों का मुख्य उद्देश्य हाउथी मिलिशिया की रसद श्रृंखला को बाधित करना और उनके सैन्य संचालन को कमज़ोर करना था. यमन समाचार एजेंसी (SABA) द्वारा उद्धृत एक सैन्य सूत्र ने बताया कि इन हमलों में विशेष रूप से मफराक मोविया और मफराक अल-धिकरा में हाउथी तत्वों और मिसाइल भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाया गया. ये दोनों स्थान ताइज़ के पूर्व में स्थित हैं और हाउथी विद्रोहियों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं. यहां मिसाइलों का भंडारण उनकी लंबी दूरी की हमलों की क्षमता को बढ़ाता है, जिसे यमनी सेना ने निशाना बनाकर नष्ट करने का प्रयास किया. इसके अलावा, ताइज़ शहर के उत्तर में अल-सित्तीन स्ट्रीट पर हाउथी सुदृढीकरण काफिले पर भी हमला किया गया. यह हमला विद्रोहियों को अग्रिम मोर्चे पर पहुँचने से रोकने और उनकी लड़ाकू क्षमता को कम करने के लिए किया गया था.
स्थानीय अधिकारियों के एक सूत्र ने यह भी जानकारी दी कि ताइज़ के दक्षिण में स्थित हयफ़ान ज़िले के अल-सुवैदा क्षेत्र में एक बहुत ही महत्वपूर्ण हमला किया गया. इस हमले में हाउथी लड़ाकों के एक बड़े जमावड़े को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया, जिसके परिणामस्वरूप उनके क्षेत्रीय नेतृत्व को भी बड़ा झटका लगा. इस कार्रवाई में कई हाउथी क्षेत्रीय नेता मारे गए, जो विद्रोहियों की कमान और नियंत्रण संरचना के लिए एक बड़ा नुकसान है. इस तरह के लक्षित हमले विद्रोहियों के मनोबल और संगठनात्मक क्षमता को प्रभावित करते हैं.
तेज़ हुए सैन्य अभियान
ये सभी सैन्य अभियान 3 सितंबर 2026 को शुरू हुए एक बड़े और तेज़ सैन्य अभियान का हिस्सा हैं. यह अभियान तब शुरू किया गया जब यमन में एक लंबे समय से चली आ रही युद्धविराम संधि अचानक टूट गई. युद्धविराम के बाद शांति बहाली की उम्मीदें धूमिल हो गईं और अब फिर से दोनों पक्षों के बीच बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव देखने को मिल रहा है. पिछले कुछ हफ्तों से यमन में सैन्य गतिविधियाँ लगातार तेज़ हुई हैं, जिससे मानवीय संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है.
इन हमलों के ठीक 24 घंटे पहले, हाउथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया था कि सऊदी युद्धक विमानों ने यमन के कई प्रांतों में हमला किया है. उनके अनुसार, ताइज़, अमरान, मारिब और सादा प्रांतों में सऊदी सेना ने 14 हवाई हमले किए और एक मिसाइल हमला भी किया. ये आरोप यह दर्शाते हैं कि क्षेत्र में संघर्ष केवल ज़मीनी नहीं बल्कि हवाई भी है, जिसमें बाहरी ताकतें भी शामिल हैं. इस बीच, एडेन (Aden) में स्थित सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ताइज़ और लाहज गवर्नरतों में हुई ज़मीनी लड़ाई में कम से कम 13 हाउथी आतंकवादी मारे गए और दर्जनों अन्य घायल हो गए. यह आँकड़ा ज़मीनी संघर्ष की तीव्रता को स्पष्ट करता है, जहां दोनों पक्ष भारी नुकसान उठा रहे हैं.
सरकार का लक्ष्य और रणनीतिक गलियारे
यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (Presidential Leadership Council) के अध्यक्ष रशाद अल-अलीमी ने देश में पूर्ण लामबंदी का आह्वान किया है. उन्होंने सभी नागरिकों से राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की है. साथ ही, उन्होंने हाउथी विद्रोहियों के लिए एक आम माफ़ी का प्रस्ताव भी जारी किया है. यह प्रस्ताव उन विद्रोहियों के लिए है जो हथियार छोड़कर मुख्यधारा में वापस लौटना चाहते हैं और शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं. सरकार का स्पष्ट और अटल लक्ष्य साना (Sana'a) सहित पूरे यमनी क्षेत्र पर राज्य संस्थाओं और संप्रभुता को बहाल करना है. उनका मानना है कि यमन तभी स्थिर हो सकता है जब सभी क्षेत्रों पर वैध सरकार का नियंत्रण हो. संघर्ष अभी भी महत्वपूर्ण रणनीतिक गलियारों पर केंद्रित है, जिनमें देश के पश्चिमी तट और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य (Bab al-Mandab Strait) तक जाने वाले मार्ग शामिल हैं. इन गलियारों का नियंत्रण संघर्ष में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह आपूर्ति मार्गों और समुद्री पहुंच को प्रभावित करता है, जिसका क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय भू-राजनीति पर भी प्रभाव पड़ता है.