बाब अल-मंदब में यमनी सेना की बढ़त, सऊदी गठबंधन का हवाई समर्थन

यमन में बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। सऊदी अरब के यमन में राजदूत मोहम्मद अल-जाबेर ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को ऐलान किया कि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से हूथी लड़ाके पूरी तरह हटा दिए गए हैं। लेकिन ज़मीन पर हालात अभी भी साफ़ नहीं हैं, और दोनों पक्ष एक-दूसरे के दावों को खारिज कर रहे हैं।
यह सब 5 अक्टूबर को शुरू हुए “ऑपरेशन ड्रॉन ऑफ यमन” के बाद हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मान्यता वाली यमन सरकार का कहना है कि इस अभियान का मक़सद हूथी कब्ज़े वाले इलाकों को वापस लेना, सना को आज़ाद कराना और देश में सरकारी संस्थाओं को फिर से खड़ा करना है।
हूथियों के कब्ज़े से लेकर ताज़ा जंग तक
इस ऑपरेशन से पहले हूथी बलों ने कई अहम ठिकानों पर नियंत्रण कर लिया था। इनमें बंदरगाह शहर मोखा, धुबाब, पेरिम यानी मयुन द्वीप और ग्रेटर व लेसर हनीश द्वीप शामिल थे। यानी लाल सागर के इस संकरे रास्ते पर हूथी मौजूदगी लंबे समय से बड़ा सिरदर्द बनी हुई थी।
यमनी सेना के प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नुज़ैली के मुताबिक़ ऑपरेशन के दौरान 1,729 सटीक हमले किए गए, जिनमें 1,370 हूथी लड़ाके मारे गए और 300 सैन्य वाहन व उपकरण नष्ट हुए। सरकारी बलों का दावा है कि उन्होंने जलडमरूमध्य में मयुन द्वीप पर पूरा नियंत्रण कर लिया है और अब इलाके को सुरक्षित रखने में जुटे हैं।
दूसरी तरफ़ हूथी प्रवक्ता अमीन हय्यान ने इन दावों को सिरे से नकार दिया है। उनका कहना है कि विद्रोही बलों ने हमलों को नाकाम किया है और सरकारी सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचाया है। यमनी सैन्य सूत्र भी मान रहे हैं कि इलाके में भीषण लड़ाई अभी जारी है।
रियाद तक पहुंची आग
हालात तब और गर्म हो गए जब 9 अक्टूबर को हूथी मिसाइल हमलों ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया। इस हमले में तीन नागरिकों की मौत हुई, कई लोग घायल हुए और एक सऊदी एयरलाइंस के विमान को भी नुकसान पहुंचा। जवाब में सऊदी गठबंधन ने रात भर सना में हूथी ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें तीन मिसाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म तबाह होने की बात कही गई है।
अमेरिका की ओर से संयुक्त राष्ट्र में उप दूत जेफ बार्टोस ने सऊदी नागरिक ढांचे पर हूथी हमलों की निंदा की और ईरान से इस समूह को समर्थन बंद करने की मांग की। इसी बीच क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए पाकिस्तान और तुर्की ने “मक्का संयुक्त रक्षा समझौते” के तहत सऊदी अरब में सहायक सैन्य कर्मी भेजने की प्रतिबद्धता जताई है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाब अल-मंदब पर दावा सच साबित होता है या लड़ाई एक और लंबे दौर में चली जाती है। जब तक दोनों पक्षों की तरफ़ से स्वतंत्र पुष्टि नहीं आती, तब तक इस इलाके की असली तस्वीर धुंधली ही रहेगी।