यमन में बड़ा संघर्ष, बाब अल मंदाब के पास हिंसक झड़पों में 189 लोगों की मौत से मचा हड़कंप.

Aanya5 September 20262 min read27 viewsYemen
यमन में बड़ा संघर्ष, बाब अल मंदाब के पास हिंसक झड़पों में 189 लोगों की मौत से मचा हड़कंप.

यमन के रणनीतिक बाब अल मंदाब जलडमरूमध्य के पास सरकार और विद्रोहियों के बीच हुई भीषण जंग में मरने वालों का आंकड़ा 189 तक पहुंच गया है। शनिवार, 5 सितंबर 2026 को सामने आई इस जानकारी के बाद पूरे इलाके में तनाव और भी ज्यादा बढ़ गया है। यह लड़ाई गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को शुरू हुई थी, जब हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के पास मौजूद मोखा बंदरगाह और आसपास के इलाकों को अपने कब्जे में लेने के लिए ताबड़तोड़ रॉकेट और ड्रोन से हमले किए थे। आम जनता और स्थानीय नागरिकों के लिए यह स्थिति काफी डरावनी साबित हो रही है क्योंकि लगातार हो रही गोलाबारी से लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ रहा है।

सरकारी सेना का काउंटरऑफेंसिव और भारी नुकसान

सेना और मेडिकल सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, इस जानलेवा संघर्ष में जान गंवाने वालों में 66 सरकारी सैनिक, कम से कम 62 हूती लड़ाके और 1 नागरिक शामिल है। हालात को काबू में करने के लिए यमन की सरकार ने शनिवार को एक बड़ा जवाबी हमला यानी काउंटरऑफेंसिव शुरू किया। सरकारी नौसेना ने कार्रवाई करते हुए अल-फजरा और मोखा बंदरगाहों को निशाना बनाने की कोशिश कर रही हूती विद्रोहियों की दो नावों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इसके अलावा, शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को सरकारी लड़ाकू विमानों ने ताएज और हुदैदा प्रांतों में हूती ठिकानों, गाड़ियों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर 15 से ज्यादा हवाई हमले किए।

विद्रोहियों के खिलाफ कड़ी चेतावनी और मानवीय संकट

यमन की प्रेसिडेंटियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन रशाद अल अलिमी ने शुक्रवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए चेतावनी दी कि सरकारी सेना बाब अल मंदाब जलडमरूमध्य की तरफ बढ़ने वाली हर हरकत का डटकर मुकाबला करेगी। उन्होंने विद्रोही गुट को यह भी साफ कर दिया कि उन्हें एक लंबी और कड़ी लड़ाई का सामना करना पड़ेगा। इसके साथ ही, अलिमी ने इस पूरे मानवीय संकट और नागरिकों के बेघर होने के पीछे हूती विद्रोहियों को ही पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। दूसरी तरफ, हूती सैन्य अधिकारियों ने हवाई हमलों की बात तो मानी है, लेकिन उन्होंने इसे सऊदी अरब की आक्रामकता करार दिया है। विद्रोहियों का दावा है कि उनका यह हमला सरकारी जमीनी ऑपरेशन के खिलाफ एक पहले से उठाया गया एहतियाती कदम था। इस जंग में यमन सरकार को सऊदी समर्थित यूनिट्स जैसे जायंट्स ब्रिगेड का पूरा साथ मिल रहा है, जिन्होंने फ्रंटलाइन पर अपनी अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात कर दिया है।

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