यमन में बढ़ती हिंसा से अब तक 8,513 लोग हुए हताहत और लाखों बेघर हुए जबकि अस्पतालों में दवाइयों की भारी कमी है

यमन में हिंसा बढ़ने से हताहतों की संख्या 8,513 हो गई है। हूती हमलों और विस्थापन से मानवीय संकट गहरा गया है।

Nura Basta22 October 20262 min read0 viewsYemen
यमन में बढ़ती हिंसा से अब तक 8,513 लोग हुए हताहत और लाखों बेघर हुए जबकि अस्पतालों में दवाइयों की भारी कमी है

यमन: देश में जारी संघर्ष के कारण हिंसा में भारी बढ़ोतरी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, अगस्त से अब तक कम से कम 1,574 लोगों की जान जा चुकी है और 6,939 लोग घायल हुए हैं। 19 अक्टूबर 2026 तक कुल हताहतों की संख्या बढ़कर 8,513 हो गई है।

हिंसा की तीव्रता पिछले कुछ दिनों में काफी बढ़ी है। 19 अक्टूबर से पहले के आठ दिनों में 292 मौतें और 1,048 लोग घायल हुए। 15 से 18 अक्टूबर के बीच रोजाना 102 से 142 लोग हताहत हो रहे थे, लेकिन 19 अक्टूबर को यह संख्या बढ़कर 428 हो गई। इसका मुख्य कारण शबवा और लहज में हुई घटनाएं रहीं।

लड़ाई की वजह से बड़े पैमाने पर लोग अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हुए हैं। 1 अगस्त से 17 अक्टूबर के बीच 2 लाख 50 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हुए, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या तइज़ गवर्नरेट की है। तइज़ में सड़कें बंद होने से व्यावसायिक और मानवीय आपूर्ति रुक गई है, जिससे अस्पतालों में ऑक्सीजन, ईंधन और दवाओं की भारी किल्लत हो गई है।

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सैन्य गतिविधियों की बात करें तो 20 अक्टूबर को हूतियों ने शबवा प्रांत के अलम ट्रेनिंग कैंप पर मिसाइल हमला किया, जिसमें 58 लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए। इसी प्रांत के एक सुरक्षा प्रशिक्षण केंद्र पर हुए हमले में 53 रिक्रूट्स की मौत हुई और 200 से ज्यादा लोग जख्मी हुए। वहीं, यमनी बलों ने बताया कि 20 अक्टूबर को समाप्त हुए 24 घंटों के ऑपरेशन में हूती मिलिशिया के 558 लोग हताहत हुए हैं।

क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ रहा है। 21 अक्टूबर को ओमान के तट के पास एक टैंकर पर हमले की खबर आई और 22 अक्टूबर को जुकर द्वीप के पास सऊदी बलों द्वारा एक भारतीय नाव को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट मिली है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने हूती लड़ाकों से मांग की है कि वे तइज़ में सहायता पहुंचाने की अनुमति दें। वहां अब तक कम से कम 32 नागरिक मारे जा चुके हैं, जिनमें 14 बच्चे और 9 महिलाएं शामिल हैं।

यूनिसेफ ने विस्थापितों के लिए बने भीड़भाड़ वाले कैंपों में साफ पानी और स्वच्छता की कमी पर चिंता जताई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि शौचालयों की कमी से हैजा के प्रकोप को रोकने में अब तक की गई प्रगति खत्म हो सकती है।

WHO और उसके साझेदारों ने 2026 की आखिरी तिमाही के लिए 31 मिलियन डॉलर का जॉइंट नेशनल रिस्पांस प्लान तैयार किया है, लेकिन अब तक केवल 3.78 मिलियन डॉलर ही जुटाए जा सके हैं।

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