यमन में भीषण संघर्ष से लाखों लोग बेघर, गहराया मानवीय संकट

यमन में चल रही भारी सैन्य तबाही और हिंसक झड़पों ने आम नागरिकों की जिंदगी को नरक बना दिया है। सरकारी ताकतों और हाउती विद्रोहियों के बीच छिड़े इस खूनी संघर्ष के कारण एक बार फिर से बड़े पैमाने पर लोगों को अपना घर-बार छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा है। इस ताजा खूनी संघर्ष ने दक्षिण-पश्चिमी यमन में एक विकराल मानवीय आपातकाल को जन्म दे दिया है, जहां हर तरफ तबाही और बदहाली का मंजर साफ दिखाई दे रहा है।
ताएज और अदन के बीच बेघर हुए हजारों परिवार
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई से लेकर अब तक लगभग 1 लाख 98 हजार लोग यानी करीब 30 हजार परिवार बेघर हो चुके हैं। तोप के गोलों की गड़गड़ाहट, भारी बमबारी और हवाई हमलों के साए में जी रहे इन लाचार लोगों के पास सुरक्षित ठिकानों की भारी कमी है। ताएज प्रांत इन विस्थापितों का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है, जहां सबसे ज्यादा 97 हजार से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं। इसके अलावा लाहज और अदन जैसे इलाकों में भी विस्थापितों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है, जो अस्थायी कैंपों में बेहद दयनीय स्थिति में दिन गुजार रहे हैं।
भुखमरी और कुपोषण के मुहाने पर खड़े करोड़ों लोग
इस खूनी संघर्ष ने केवल बेघर ही नहीं किया, बल्कि पूरे देश को भुखमरी के कगार पर ला खड़ा किया है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, यमन में करोड़ों लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, जिनमें लाखों छोटे बच्चे कुपोषण की भयानक चपेट में हैं। युद्ध की इस विभीषिका के बीच मानवीय सहायता पहुंचाने वाली एजेंसियों और उनके कर्मियों के सामने भी भारी रुकावटें आ रही हैं, जिससे राहत कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बिगड़ते हालातों पर गहरी चिंता जताई है और हिंसा को तत्काल रोकने की अपील की है।