यमन में फिर भड़की जंग, 85 हजार से ज्यादा लोग हुए बेघर, हालात हुए बेहद खराब।

यमन में चल रही खतरनाक लड़ाई ने आम लोगों की जिंदगी को पूरी तरह तबाह कर दिया है और हालात बहुत ज्यादा बिगड़ चुके हैं। सरकारी सेना और हौथी विद्रोहियों के बीच तेज हुई जंग की वजह से अब तक 85,818 लोग अपना घर-बार छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं। इस बात की जानकारी इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन यानी IOM ने दी है। हिंसा इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि सितंबर महीने की शुरुआत से लेकर अब तक 82,000 से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं और अकेले एक दिन में ही 10,000 लोगों ने डर के मारे अपना घर छोड़ा है। इसके बारे में विस्तार से आप IOM की आधिकारिक रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं।
लोगों के पास खाने को दाना और रहने को छत नहीं
IOM की डायरेक्टर जनरल एमी पोप ने चेतावनी दी है कि आम परिवारों का सब कुछ खत्म हो गया है और वे जान बचाने के लिए बहुत ही खतरनाक हालातों में समुद्र पार करने को मजबूर हैं। वहीं यमन में IOM के प्रमुख मिशन अब्दुसत्तार इसोएव ने बताया कि जो लोग अपनी जान बचाकर पहुंच रहे हैं, उनके पास खाने के लिए बुनियादी चीजें और रहने के लिए छत तक नहीं है। इस बारे में और अधिक जानकारी IOM Yemen की अपडेट में दी गई है। सबसे बुरा हाल Taiz गवर्नरट का है जहां अकेले 56,000 लोग विस्थापित हुए हैं। इसके अलावा Lahj, Al Hodeidah और Aden में भी हालात बहुत खराब हैं जबकि 2,000 से ज्यादा शरणार्थियों ने जिबूती पहुंचकर अपनी जान बचाई है, जैसा कि इस रिपोर्ट में बताया गया है।
रणनीतिक इलाकों पर कब्जा और क्षेत्रीय तनाव
हौथी विद्रोहियों ने अपनी रणनीति बदलते हुए बंदरगाह शहर Mokha, Dhubab टाउन और Perim द्वीप पर कब्जा कर लिया है, जिससे बाब एल-मंदेब जलडमरूमध्य पर उनका नियंत्रण मजबूत हो गया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए यमन के सरकारी अधिकारी सुल्तान अल-अरदा ने इन इलाकों में सेना के पीछे हटने को दुखद बताया और कहा कि सैनिक फिर से संगठित हो रहे हैं। दूसरी ओर हौथी सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याहया सारी ने सऊदी अरब के शरूराह प्रांत में एक सैन्य बेस पर ड्रोन और मिसाइल हमले की जिम्मेदारी ली है और नज्रान तथा अल-तौवाल में भी हमलों की खबर दी है।
मानवीय सहायता में भारी कमी और खुला युद्ध
संयुक्त राष्ट्र के यमन में दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने कड़ी चेतावनी दी है कि देश एक बार फिर से खुले युद्ध की तरफ बढ़ रहा है, जिसका मतलब है कि साल 2022 में शुरू हुआ संघर्ष विराम अब खत्म हो चुका है। लगातार हो रही बमबारी और एयरस्ट्राइक के बीच इस्लामिक रिलीफ संस्था का कहना है कि दुनिया भर से मिलने वाले फंड में कटौती के कारण जरूरी मानवीय मदद लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगियों को साल 2026 के लिए जरूरी 2.16 अरब डॉलर के फंड की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से 12 मिलियन यानी एक करोड़ बीस लाख लोग मदद के लिए तरस रहे हैं क्योंकि रास्ते खराब होने की वजह से राहत सामग्री ले जाने वाली गाड़ियां वहां तक नहीं पहुंच पा रही हैं।