यमन में फिर भड़की हिंसा: 1.37 लाख छात्रों की पढ़ाई रुकी, भविष्य अधर में

यमन में एक बार फिर युद्ध की आग भड़क उठी है, जिसने हजारों परिवारों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। इस भीषण हिंसा का सबसे बुरा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ा है। यूनिसेफ (UNICEF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यमन में दोबारा शुरू हुई लड़ाई के कारण 1,37,000 से अधिक छात्र अब अपनी पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। युद्ध की विभीषिका का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 12 साल के अहमद जैसे हजारों बच्चों को अपनी किताबें और स्कूल बैग छोड़कर अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा है।
मानवीय स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी है कि इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में ही 2 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। इसमें सबसे ज्यादा मार ताइज़ (Ta'iz) गवर्नरेट पर पड़ी है, जहाँ से आधे से अधिक लोग पलायन करने को मजबूर हुए हैं। इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं, जहाँ सऊदी समर्थित सेना और हूती विद्रोहियों के बीच रणनीतिक ठिकानों के लिए संघर्ष जारी है।
बर्बाद होते स्कूल और भूख का साया
शिक्षा का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। सितंबर के मध्य तक करीब 243 स्कूलों को या तो बंद कर दिया गया है या उन्होंने काम करना बंद कर दिया है। यह संकट नया नहीं है, लेकिन ताजा हिंसा ने इसे और गहरा कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार, यमन में लगभग 32 लाख बच्चे स्कूल से बाहर हैं, जिनमें 15 लाख लड़कियां शामिल हैं। यूनिसेफ के क्षेत्रीय निदेशक एडौर्ड बेइगबेडर ने चेतावनी दी है कि यह हिंसा उस पीढ़ी की स्थिरता को खत्म कर रही है जो पहले से ही सालों के संघर्ष और भूख से जूझ रही है।
सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की हालत भी दयनीय है। हूती नियंत्रित इलाकों में 1.7 लाख से ज्यादा शिक्षकों को संघर्ष के शुरुआती वर्षों से ही नियमित वेतन नहीं मिला है। इसके साथ ही, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने आगाह किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में चार में से तीन परिवार गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। सबसे डराने वाली बात यह है कि 5 साल से कम उम्र के 22 लाख से ज्यादा बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हैं।