यमन संघर्ष तेज़: सऊदी अरब पर 129 हवाई हमले करने का लगा गंभीर आरोप

यमन के Houthi आंदोलन ने Saudi Arabia पर पिछले 48 घंटों के दौरान कुल 129 हवाई हमले करने का गंभीर आरोप लगाया है। यह अवधि 12 सितंबर 2026 को समाप्त हुई है। हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Sarea ने आधिकारिक रूप से जानकारी दी है कि ये सभी हमले सऊदी के F-15 और Typhoon लड़ाकू विमानों द्वारा अंजाम दिए गए। ये विमान Khamis Mushait और Taif के सैन्य अड्डों से उड़ान भरकर आए थे। प्रवक्ता ने बताया कि इन हमलों की वजह से Taiz, Marib, Hodeidah, Al-Jawf, Saada, Amran और Hajjah प्रांतों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हूती गुट ने चेतावनी दी है कि उनके खिलाफ की जा रही इन कार्यवाहियों का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
सऊदी सीमा पर तनाव और जमीनी हालात
दूसरी तरफ, Saudi Arabia की तरफ से इन 129 हमलों के आरोपों पर अभी तक कोई सीधी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल Turki al-Maliki ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। यह तनाव तब और बढ़ गया जब 12 सितंबर को एक हूती प्रोजेक्टाइल सऊदी सीमा के पास आ गिरा। इस घटना में दो लोग घायल हो गए और एक स्थानीय मस्जिद, कई वाहन तथा बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
क्षेत्रीय बढ़त और मानवीय संकट
यह पूरा हवाई संघर्ष ऐसे समय में हो रहा है जब हूती लड़ाके लगातार अपनी स्थिति मजबूत करते हुए बड़े इलाकों पर कब्जा जमा रहे हैं। बीते 10 सितंबर को इस समूह ने बंदरगाह शहर Mocha पर कब्जा कर लिया था, और उसके ठीक अगले दिन यानी 11 सितंबर को Bab el-Mandeb जलडमरूमध्य में स्थित Perim Island को भी अपने नियंत्रण में ले लिया। हूती गुट की इन लगातार अग्रिम सफलताओं ने सरकार समर्थक सेनाओं को पीछे धकेल दिया है, जिससे वे यमन की अस्थायी राजधानी Aden की तरफ जाने को मजबूर हो गए हैं। इसके जवाब में सऊदी समर्थित सरकारी सेनाओं ने Mocha में जवाबी हमले किए हैं, जिसमें कई हूती लड़ाकों के मारे जाने और उनके सैन्य वाहनों व हथियारों को नष्ट किए जाने का दावा किया गया है।
इस संघर्ष के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते से लेकर अब तक लगभग 46,000 लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। इसके साथ ही, हूती आंदोलन ने यह भी दावा किया है कि उसने सरकार समर्थक बलों द्वारा पहले से हिरासत में रखे गए अपने 200 से अधिक सदस्यों को सुरक्षित रिहा करा लिया है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अमेरिका की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है और कूटनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने अमेरिका से हूती बलों के खिलाफ सीधी सैन्य मदद की मांग की थी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस संघर्ष में सीधे तौर पर सैन्य रूप से शामिल होने से इनकार कर दिया है। इसके बावजूद, अमेरिका ने लाल सागर Red Sea के शिपिंग रूट्स और समुद्री व्यापार के संभावित बाधित होने को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। हूती गुट अभी भी अपनी आक्रामक शैली पर कायम है, जबकि Saudi Arabia यमन की मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने और अपनी सीमाओं को ईरानी समर्थित हूती गतिविधियों से सुरक्षित रखने की कोशिशों में जुटा हुआ है।