यमन में फिर भड़का युद्ध, हूती विद्रोहियों ने मोखा और बंदरगाह पर किया कब्जा, सऊदी अरब पर हमला.

यमन का संघर्ष अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जहां हालात एक बार फिर पूर्ण युद्ध की तरफ लौट रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लड़ाई केवल देश के भीतर की आपसी कलह नहीं है, बल्कि इसमें कई देशों की ताकतें शामिल हैं। 10 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई, जिसे बहरीन और यूके ने अनुरोध करके आयोजित कराया था। इस बैठक में यूएन दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने चेतावनी दी कि यमन एक बार फिर से पूर्ण पैमाने पर युद्ध के मुहाने पर खड़ा हो गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल पैदा हो गया है।
यमन में क्षेत्रीय तनाव और हूती विद्रोहियों की बढ़त
हाल ही में ज़मीनी स्तर पर बदलाव देखने को मिला है, जहां हूती लड़ाकों ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले बंदरगाह शहर मोखा, धूबाब शहर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में स्थित पेरिम द्वीप पर अपना कब्जा जमा लिया है। इन इलाकों पर नियंत्रण होने के बाद अब वैश्विक समुद्री मार्ग पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा है। इसके अलावा 12 सितंबर को सऊदी अरब के अल-ताव्वाल गवर्नरट पर हूती गुट की तरफ से दागा गया एक प्रोजेक्टाइल आ गिरा, जिसके कारण दो लोग घायल हो गए और संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुंचा। इस लगातार बढ़ते तनाव के बीच यूके की राजदूत केट फोस्टर ने इस नई आक्रामकता की कड़ी निंदा की है और सऊदी अरब तथा यमन को अपनी आत्मरक्षा का पूरा अधिकार बताया है। इस संबंध में अधिक जानकारी UK Government Official Speech पर देखी जा सकती है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस संकट को सुलझाने के लिए तुरंत बातचीत शुरू करने की अपील की है ताकि हालात को और बिगड़ने से रोका जा सके।
मानवीय संकट और विस्थापन की स्थिति
इस खूनी संघर्ष का आम जनता पर बहुत बुरा असर पड़ा है और लोग अपना घर-बार छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के कारण विस्थापित होने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़कर 85,000 से अधिक हो गई है, जिनमें से अकेले सितंबर की शुरुआत से लेकर अब तक 82,000 से ज्यादा लोग बेघर हुए हैं। इसके अलावा केवल 24 घंटे के छोटे से अंतराल में 1,400 लोग भागकर जिबूती पहुंच गए। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए IOM की महानिदेशक एमी पोप ने अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से तुरंत आगे आने और मदद करने की गुहार लगाई है। इस पूरी रिपोर्ट को IOM News Report और ReliefWeb Yemen Update पर पढ़ा जा सकता है। यमन सरकार के भीतर प्रेसिडेंटल लीडरशिप काउंसिल के सुल्तान अल-अरदा ने तटीय इलाकों के नुकसान को एक दर्दनाक झटका माना है, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि उनकी सेनाएं हूती हमलों का मुकाबला करने के लिए फिर से संगठित हो रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया कि हूतियों ने अमेरिका से यह आग्रह किया था कि वह सऊदी अरब के साथ उनके संघर्ष में पूरी तरह तटस्थ रहे, जबकि अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह स्पष्ट किया है कि लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करना ही उनका मुख्य उद्देश्य है।