Yemen Conflict: हूती विद्रोहियों ने मोखा और धुबाब पर किया कब्ज़ा, सऊदी अरब पर भी दागी मिसाइलें

यमन में चल रहा गृहयुद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है जहां Houthi movement ने अपनी सैन्य गतिविधियों को बहुत ज्यादा तेज कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में इस संगठन ने देश के कई बड़े और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। आम लोगों और स्थानीय प्रशासन के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बनती जा रही है क्योंकि लगातार हो रहे हमलों से पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों और स्थानीय लोगों के बीच इसको लेकर भारी डर का माहौल बना हुआ है क्योंकि शांति की सारी उम्मीदें अब लगभग टूट चुकी हैं।
मोखा शहर पर कब्जा और रणनीतिक बढ़त
गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को हूती लड़ाकों ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम पोर्ट सिटी Mokha पर अपना कब्जा जमा लिया। इसके बाद शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 तक इस समूह ने अपने पैर पसारते हुए धुबाब शहर और पास के Perim Island पर भी नियंत्रण हासिल कर लिया। इन इलाकों के हाथ लगने से हूती विद्रोहियों की ताकत Bab el-Mandeb Strait के पास काफी ज्यादा बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि इस समुद्री रास्ते पर पकड़ मजबूत होने से आने-जाने वाले जहाजों पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी प्रभावित हो सकता है।
सऊदी अरब के शारूराह मिलिट्री बेस पर हमला
रविवार, 13 सितंबर 2026 को हूती सेना के प्रवक्ता Yahya Saree ने यह दावा किया कि उन्होंने दक्षिणी सऊदी अरब के Sharurah शहर में स्थित एक बड़े मिलिट्री बेस पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा हमला किया है। उनके मुताबिक यह कार्रवाई यमन के भीतर हो रही सऊदी सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में की गई है जिसमें कमांड सेंटर्स और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया गया। हालांकि सऊदी अधिकारियों की तरफ से इस विशेष घटना पर तुरंत कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यमन में जारी इस संघर्ष की आंच अब पड़ोसी देशों तक पहुंच रही है।
सऊदी अरब के जाज़ान में नागरिक घायल
सऊदी सिविल डिफेंस विभाग ने शनिवार, 12 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी कि हूती विद्रोहियों की तरफ से दागा गया एक प्रोजेक्टाइल सऊदी के Al-Tuwal governorate (जाज़ान क्षेत्र) में आकर गिरा। इस हमले की चपेट में आने से दो आम नागरिक घायल हो गए और स्थानीय मस्जिद, कई गाड़ियां तथा इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज के कमांडर Tariq Saleh के नेतृत्व में सेना ने यह कसम खाई है कि वे यमन को ईरान समर्थित ताकतों से पूरी तरह आजाद कराने तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
लाखों लोग हुए विस्थापित और मानवीय संकट
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हालिया क्षेत्रीय नुकसान और पीछे हटना उनके लिए एक बड़ा झटका है। उनका कहना है कि सरकारी मिली-जुली सेनाओं के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण ही यह सामरिक विफलता देखने को मिली। International Organization for Migration की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 से चला आ रहा संघर्ष विराम अब पूरी तरह टूट चुका है, जिसके चलते सितंबर की शुरुआत से लेकर अब तक 85,000 से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं।