यमन युद्ध की विभीषिका: हजारों लोग मारे गए, लाखों बेघर और परिवार तबाह
यमन में हूती बलों और सरकार के बीच संघर्ष में हजारों लोग मारे गए और घायल हुए हैं। लाखों लोग विस्थापित होकर गंभीर संकट झेल रहे हैं।

यमन: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और हूती बलों के बीच जारी खूनी संघर्ष ने देश को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। इस युद्ध में बड़ी संख्या में लड़ाकों और आम नागरिकों की जान जा रही है, जिससे उनके परिवार गहरे भावनात्मक और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 अक्टूबर 2026 तक हालात और बिगड़ गए हैं। हालिया लड़ाई के कारण 2.80 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। इस संकट का असर 65 हजार से अधिक शरणार्थियों और शरण चाहने वालों पर पड़ा है, जो आर्थिक तबाही और मानवीय सहायता की कमी का सामना कर रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया कि अगस्त से अब तक करीब 1,700 लोग मारे गए हैं और 7,000 से ज्यादा घायल हुए हैं। अक्टूबर 2026 के आखिरी हफ्ते में स्थिति इतनी गंभीर थी कि रोजाना औसतन 93 लोग हताहत हुए। यह लड़ाई मुख्य रूप से ताइज़, लहज और मारिब प्रांतों में केंद्रित है।
हिंसा के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया है। 20 अक्टूबर को ताइज़ के अल-थौरा जनरल अस्पताल पर हमला हुआ, जिसमें तीन सैनिकों और एक मरीज के घायल होने की खबर है।
UNHCR के प्रवक्ता मैथ्यू साल्टमार्श ने 30 अक्टूबर को बताया कि सहायता पहुंचाना बेहद खतरनाक हो गया है। उन्होंने कहा कि कई विस्थापित लोग वितरण केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं क्योंकि सहायता टीमों के लिए वहां जाना सुरक्षित नहीं है। लहज के खराज़ शरणार्थी शिविर में सेवाएं बुरी तरह बाधित हुई हैं, जिससे करीब 9,500 शरणार्थी प्रभावित हैं।
राहत कार्यों के तहत UNHCR ने दुबई से यमन के लिए आपातकालीन राहत सामग्री के 11 कंटेनर भेजे हैं, जिनके 31 अक्टूबर तक पहुंचने की उम्मीद है। इसमें 3,000 राहत किट शामिल हैं, जो 20 हजार से अधिक लोगों की मदद करेंगे। वहीं, यूरोपीय आयोग ने मानवीय कार्यों के लिए 2026 की फंडिंग बढ़ाकर 110 मिलियन यूरो कर दी है।