यमन में फिर भड़की हिंसा: बढ़ता मानवीय संकट और बदलता युद्ध का मैदान

Nura Basta30 September 20263 min read0 viewsYemen
यमन में फिर भड़की हिंसा: बढ़ता मानवीय संकट और बदलता युद्ध का मैदान

यमन में जारी संघर्ष ने एक बार फिर भयावह रूप ले लिया है, जिससे 2022 में हुआ युद्धविराम पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। हालिया सैन्य बढ़त और बढ़ती हिंसा ने न केवल देश के नक्शे को बदल दिया है, बल्कि एक बड़े मानवीय संकट को भी जन्म दिया है। हूती विद्रोहियों के बढ़ते कदमों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है, विशेष रूप से समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर।

रणनीतिक इलाकों पर कब्ज़ा और बदलती सीमाएं

युद्ध के ताजा घटनाक्रम में हूती बलों ने लाल सागर (Red Sea) के तट पर बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर मोखा (Mokha) पर कब्ज़ा कर लिया है और कई महत्वपूर्ण द्वीपों पर अपना नियंत्रण बढ़ा लिया है।

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प्रमुख बदलावों पर एक नज़र:

  • बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य: हूती बलों ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नियंत्रण पाने की कोशिश की है।
  • महत्वपूर्ण द्वीप: पेरिम द्वीप और हनिश द्वीपों पर भी बढ़ता प्रभाव वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है।
  • क्षेत्रीय अस्थिरता: संयुक्त राष्ट्र ने इन समुद्री गलियारों की स्थिरता को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।

विस्थापन और भूख का गहराता संकट

इस युद्ध की सबसे दुखद तस्वीर यमन के आम नागरिकों के जीवन में दिखाई दे रही है। सितंबर की शुरुआत से अब तक लगभग 1,42,000 लोग अपने घरों से भागने को मजबूर हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के आंकड़े बताते हैं कि जून 2026 से अब तक 1,34,550 लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं, जिनमें से अधिकांश ताइज और लाहज प्रांतों में रह रहे हैं।

मानवीय स्थिति की भयावहता:

  1. खाद्य असुरक्षा: लगभग 2.23 करोड़ लोगों को तत्काल सहायता की आवश्यकता है, जिनमें से 1.83 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
  2. कुपोषण का खतरा: पांच साल से कम उम्र के 22 लाख से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इनमें से 5,16,000 से अधिक बच्चे 'गंभीर तीव्र कुपोषण' (Severe Acute Malnutrition) की स्थिति में हैं।
  3. स्वास्थ्य व्यवस्था का पतन: अस्पतालों में दवाओं की कमी है और हैजा (Cholera) जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग लगातार हूती वार्ताकारों के साथ बातचीत कर रहे हैं ताकि क्षेत्रीय संघर्ष को बढ़ने से रोका जा सके। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद जमीनी स्तर पर हिंसा कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है।

इस बढ़ते तनाव पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सैन्य वृद्धि की कड़ी निंदा की है और मानवीय सहायता के लिए निर्बाध पहुंच की मांग की है। वहीं, अमेरिका ने हूती विद्रोहियों की सैन्य क्षमता को सीमित करने के लिए मौजूदा हथियार प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने का आग्रह किया है।

"यमन में बढ़ता संघर्ष न केवल देश के भीतर बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती है।"

दूसरी ओर, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूती बढ़त की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि यह कदम ईरानी हितों को साधने के लिए उठाया जा रहा है। भूमिगत बारूदी सुरंगों और बिना फटे बमों के बढ़ते खतरे ने इस संकट को और अधिक जटिल बना दिया है।

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