यमन संघर्ष का असर: सऊदी अरब में धमाके और हवाई सेवाओं में भारी व्यवधान

Nura Basta7 October 20262 min read0 viewsSaudi
यमन संघर्ष का असर: सऊदी अरब में धमाके और हवाई सेवाओं में भारी व्यवधान

यमन में जारी भीषण संघर्ष अब सऊदी अरब की सीमाओं को पार कर अंदर तक पहुंच गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। पिछले 24 घंटों के भीतर हुई हिंसक झड़पों में दोनों पक्षों के करीब 270 लोगों की जान चली गई है, जिसमें सरकारी सेना के 115 और हूती विद्रोहियों के लगभग 160 लड़ाके शामिल हैं। इस युद्ध का असर अब आम नागरिकों और खासकर सऊदी अरब में रह रहे लाखों भारतीय और पाकिस्तानी प्रवासियों पर पड़ रहा है, क्योंकि रियाद, जिज़ान और नज़रान जैसे शहरों में उड़ानें प्रभावित हुई हैं।

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एक अरमको रिफाइनरी को निशाना बनाया है। हालांकि, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इन मिसाइलों को बीच में ही रोकने का दावा किया है। इसके बावजूद, रियाद में मंगलवार शाम और बुधवार सुबह धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। फ्लाइटराडार24 के आंकड़ों से पता चलता है कि किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बीच-बीच में बंद करना पड़ा, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

जमीनी जंग और मानवीय संकट का गहराता साया

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युद्ध की आग अब दक्षिण-पश्चिमी तइज़ और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य तक फैल गई है, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। सऊदी समर्थित सरकार ने सना पर दोबारा नियंत्रण पाने के लिए 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' शुरू किया है। गठबंधन का दावा है कि इस अभियान की शुरुआत में 100 लड़ाकू विमानों ने 324 महत्वपूर्ण ठिकानों को तबाह कर दिया है।

इस हिंसा का सबसे दर्दनाक पहलू मानवीय संकट है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, लाल सागर तट पर हो रही लड़ाई के कारण 1.84 लाख से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं। केवल कुछ ही दिनों के भीतर हजारों लोग अपनी जान बचाने के लिए पलायन करने को मजबूर हुए हैं। हूती स्वास्थ्य मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि एक सऊदी हवाई हमले में एक ही परिवार के छह सदस्य मारे गए, जिनमें चार बच्चे भी शामिल थे।

रणनीतिक स्तर पर, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। पाकिस्तान और तुर्की संभावित सैन्य तैनाती की तैयारी कर रहे हैं। इस बीच, पाकिस्तान उलेमा काउंसिल के प्रमुख ताहिर महमूद अशरफी ने सऊदी अरब में रह रहे पाकिस्तानी प्रवासियों को सलाह दी है कि वे ड्रोन और मिसाइल हमलों से जुड़ी किसी भी अपुष्ट खबर को साझा न करें।

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव तब और बढ़ गया जब ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अमेरिका के साथ बातचीत को अर्थहीन बताया। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हमलों के बीच यह बयान क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।

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