मोखा पर हौती कब्ज़ा, यमन में गहराया मानवीय संकट

यमन के महत्वपूर्ण लाल सागर बंदरगाह शहर मोखा में स्थिति बेहद गंभीर होती जा रही है। 10 सितंबर को हौती बलों द्वारा इस शहर पर कब्जा किए जाने के बाद से वहां का मानवीय और सुरक्षा ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। 2022 के युद्धविराम के टूटने के बाद से यमन में एक बार फिर से हिंसा भड़क उठी है, जिसके परिणामस्वरूप जुलाई से लेकर अब तक लगभग 1.98 लाख लोग अपना घरबार छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, मोखा के भीतर हालात भयावह हैं। अस्पतालों को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है और आवश्यक चिकित्सा उपकरण कथित तौर पर सना स्थानांतरित कर दिए गए हैं। इसके अलावा, शहर में रात का कर्फ्यू लागू है तथा खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे आम जनता का जीना मुहाल हो गया है।
संघर्ष का बढ़ता दायरा और मानवीय त्रासदी
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्च कमिश्नर वोल्कर टर्क ने अगस्त की शुरुआत से सितंबर के अंत तक भारी हताहतों और विस्थापन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। वहीं, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि ताजा लड़ाई के कारण ताइज़ और हुदायदा के कुछ हिस्सों में 3.5 लाख लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाना असंभव हो गया है। विस्थापितों के लिए काम करने वाली सरकारी इकाई के प्रमुख नजीब अल-सादी ने आरोप लगाया है कि हौती बल मानवीय सहायता कार्यों में लगातार बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।
सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमले
यमन सरकार के सैन्य प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नुज़ैली ने पुष्टि की है कि सना, सादा और ताइज़ में हौती ठिकानों के खिलाफ सैन्य अभियान तेजी से जारी है। दूसरी ओर, हौती सैन्य प्रवक्ता याहया सारे ने रियाद में एक अरामको सुविधा पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने की जिम्मेदारी ली है। उनका दावा है कि यह कार्रवाई यमन भर में हुए हवाई हमलों के जवाब में की गई है।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (OCHA) ने चेतावनी दी है कि विस्थापितों की बढ़ती संख्या के कारण बीमारियों फैलने का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। यदि जल्द ही कोई ठोस कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यमन में यह मानवीय संकट और अधिक विकराल रूप धारण कर सकता है।