यमन संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: सऊदी तेल केंद्रों पर हमले और बढ़ता तनाव

Gautam Sahu5 October 20262 min read0 viewsWorld
यमन संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: सऊदी तेल केंद्रों पर हमले और बढ़ता तनाव

मिडल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। यमन में जारी हिंसक संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर दी है। हालिया घटनाओं में सऊदी अरब के रियाद के दक्षिण में स्थित एक सऊदी अरामको (Aramco) सुविधा में भीषण आग लग गई, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है।

हूती सैन्य प्रवक्ता याहिया सारे ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए इस साइट को निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि खुराइस तेल क्षेत्र पर भी दूसरा हमला किया गया है। हालांकि, सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मालकी ने इन दावों को भ्रामक बताया, लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिफाइनरी में लगी आग के वीडियो फुटेज की पुष्टि की है। इस तनाव का सीधा असर बाजार पर पड़ा और ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर लगभग 103.06 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।

जमीनी जंग और ईरान की शर्तें

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यमन के भीतर हालात और भी गंभीर हैं। राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने अपना खोया हुआ क्षेत्र वापस पाने के लिए सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। इस भीषण लड़ाई में सरकारी बलों के 34 जवान मारे गए, जबकि हूती लड़ाकों के 39 सदस्यों की मौत की खबर है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया है कि उन्होंने 97 सटीक हमले किए, जिनमें 260 हूती लड़ाके मारे गए और 44 सैन्य वाहन तबाह हुए। दूसरी ओर, हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने 24 घंटों के भीतर 106 हमले किए हैं और दक्षिणी ताइज़ में 'अत तुर्बाह' पर कब्जा कर लिया है।

इस पूरे संकट के केंद्र में ईरान की भूमिका भी अहम है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबफ ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी सात शर्तें पूरी नहीं होतीं, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। इन शर्तों में अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी का अंत, जमी हुई संपत्तियों की वापसी, तेल प्रतिबंध हटाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।

समुद्र में तनाव इतना बढ़ गया है कि रविवार को इस जलडमरूमध्य में एक टैंकर पर अज्ञात मिसाइल हमला हुआ, जिससे उसके इंजन रूम को नुकसान पहुंचा। आर्थिक रूप से यह युद्ध बहुत महंगा साबित हो रहा है; अनुमान है कि करीब 80 ऊर्जा स्थलों को नुकसान पहुंचा है, जिसकी मरम्मत लागत 58 अरब डॉलर तक जा सकती है।

इस बीच, यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) ने एयरलाइंस को 16 नवंबर तक जेद्दा के कुछ हवाई क्षेत्रों से बचने की सलाह दी है। जहां एक ओर अमेरिका सऊदी अभियान में मदद कर रहा है, वहीं पाकिस्तान ने भी सऊदी अरब को रक्षा सहायता देने का वादा किया है।

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