यमन में एक महीने से जंग जारी, अल-जौफ और तइज़ में सरकारी सेना और हूतियों में भिड़ंत

यमन में सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच युद्ध अब थकावट की जंग में बदल गया है। तइज़ में घेराबंदी से मानवीय संकट गहरा गया है।

Nura Basta5 November 20262 min read0 viewsYemen
यमन में एक महीने से जंग जारी, अल-जौफ और तइज़ में सरकारी सेना और हूतियों में भिड़ंत

यमन: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार द्वारा हूती आंदोलन के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए शुरू किए गए 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' को एक महीना बीत चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष अब एक भीषण 'वॉर ऑफ एट्रिशन' यानी थकावट की जंग में तब्दील हो गया है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी के नेतृत्व वाली प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (अंसार अल्लाह) में से कोई भी तनाव कम करने के मूड में नहीं दिख रहा है। सैन्य गतिविधियां अभी भी तेज हैं और मुख्य रूप से अल-जौफ और तइज़ जैसे हॉटस्पॉट में भारी लड़ाई जारी है। सरकारी बलों ने दावा किया है कि उन्होंने अल-जौफ पर्वत श्रृंखला के भीतर रणनीतिक स्थानों पर अपना नियंत्रण बना लिया है।

दूसरी ओर, तइज़ शहर पिछले एक महीने से हूतियों की घेराबंदी का सामना कर रहा है। इस घेराबंदी ने शहर के मुख्य संपर्क मार्गों को पूरी तरह काट दिया है, जिससे वहां गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चेतावनी दी है कि यहां रहने वाले लाखों लोग भोजन, दवा और ईंधन की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं।

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ह्यूमन राइट्स वॉच सहित कई संगठनों का कहना है कि घेराबंदी की ये रणनीति युद्ध अपराधों की श्रेणी में आ सकती है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवीय एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बढ़ी हुई शत्रुता के कारण अब तक 3 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं।

क्षेत्रीय तनाव ने इस स्थिति को और बिगाड़ दिया है। यमन सरकार ने आरोप लगाया है कि हूती सैन्य अभियानों की मदद के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और हिजबुल्लाह ने अपने विशेषज्ञों को वहां तैनात किया है।

यूरोपीय संघ और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों द्वारा संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली शांति वार्ता पर लौटने की अपील की जा रही है। हालांकि, 2022 के युद्धविराम के टूटने के बाद अब सभी पक्ष सैन्य उद्देश्यों के जरिए सत्ता का नया संतुलन बनाने की कोशिश में जुटे हैं।

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