यमन युद्ध से दुनिया भर में बढ़ सकती है खाने-पीने की कीमतों में आग, WFP प्रमुख ने दी बड़ी चेतावनी

यमन में चल रहे युद्ध को लेकर एक बहुत बड़ी चेतावनी सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम (WFP) के प्रमुख ने कहा है कि यमन में बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए मुसीबत बन सकता है। इससे दुनिया भर में खाने-पीने की चीज़ों के दाम बहुत तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों की मुश्किलें और ज़्यादा बढ़ जाएंगी।
तीन समुद्री रास्तों पर मंडराया संकट
इस चेतावनी में सबसे बड़ी चिंता तीन मुख्य समुद्री रास्तों को लेकर जताई गई है। WFP के मुताबिक, इस युद्ध की वजह से Strait of Hormuz (हॉर्मुज जलडमरूमध्य), Red Sea (लाल सागर) और Black Sea (काला सागर) पर 'ट्रिपल चोकपॉइंट' यानी एक साथ तीन जगहों पर रुकावट आने का खतरा पैदा हो गया है। ये तीनों रास्ते पूरी दुनिया में अनाज, ईंधन और खादों की सप्लाई के लिए बहुत ज़रूरी माने जाते हैं। अगर इन रास्तों पर कोई रुकावट आती है, तो पूरी दुनिया के बाज़ारों में हाहाकार मच सकता है। इस बारे में ReliefWeb की एक रिपोर्ट में विस्तार से जानकारी दी गई है।
यमन के भीतर भुखमरी का कगार
यमन के अंदरूनी हालात भी दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा लगाई गई नाकेबंदी के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में भारी दिक्कतें आ रही हैं। हालत यह है कि लाखों लोगों के सिर पर मौत का खतरा मंडरा रहा है। सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी नियंत्रण वाले इलाकों में रहने वाली लगभग 47% आबादी गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक, जून से सितंबर 2026 के बीच सूखे और मंदी के इस मौसम में लगभग 54 लाख लोग दाने-दाने को तरस सकते हैं। साल के अंत तक लगभग 18 लाख लोगों के हालात बेहद नाजुक यानी इमरजेंसी जैसे होने की आशंका है। इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए आप WFP की यमन खाद्य सुरक्षा रिपोर्ट को देख सकते हैं।
रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान पर
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में होने वाली उथल-पुथल का असर यमन के स्थानीय बाज़ारों पर बहुत तेजी से पड़ रहा है। जून 2026 तक, अदन के मुख्य बाज़ार में न्यूनतम भोजन की टोकरी (Minimum Food Basket) की कीमत में फरवरी की तुलना में 5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, सना के नियंत्रण वाले इलाकों में बुनियादी खाद्य पदार्थों की कीमतों में 13% तक की तेजी देखी गई है। जुलाई की शुरुआत में नए कस्टम ड्यूटी और टैक्स लागू होने की वजह से गेहूं का आटा, चीनी, चावल और खाने के तेल जैसी ज़रूरी चीजों की कीमतों में 24% प्रति लीटर तक का भारी उछाल आया है।
पैसे की कमी और राजनीतिक तनाव
इस संकट से निपटने में जुटी वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम खुद भी पैसों की भारी किल्लत का सामना कर रही है। साल 2025 के अंत तक WFP के पास यमन में काम करने के लिए केवल 9% फंड ही उपलब्ध था। इसके अलावा, उत्तरी यमन में संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद से वहां संयुक्त राष्ट्र की सभी गतिविधियों को रोक दिया गया है, जिससे राहत कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। इस संकट को लेकर अधिक जानकारी ReliefWeb की यमन अपडेट रिपोर्ट में उपलब्ध है।
सुरक्षा परिषद में बुलाई गई आपात बैठक
हालात की गंभीरता को देखते हुए 10 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) की एक आपात बैठक बुलाई गई। यह बैठक बहरीन और ब्रिटेन की मांग पर आयोजित की गई थी। संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत Hans Grundberg को इस सैन्य तनाव को कम करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हाल ही में हूती विद्रोहियों द्वारा बुनियादी ढांचों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले तेज कर दिए गए हैं और कई अहम ठिकानों पर फिर से लड़ाई शुरू हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस तनाव को तुरंत नहीं रोका गया, तो यह पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल सकता है।